हिमाचल में नशे पर लगाम कसने के लिए मकोका की तर्ज़ पर बनेगा हकोका एक्ट

भारत में महाराष्ट्र और दिल्ली में यह कानून लागू मकोका एक्ट का मुख्य मकसद संगठित व अंडरवर्ल्ड अपराध को खत्म करना है| महाराष्ट्र राज्य सरकार ने सन 1999 में मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट) की नींव रखी थी, जिस से पुलिस को बहुत मदद मिली थी। इसी की तर्ज़ इसे पर सन 2002 में दिल्ली सरकार ने भी लागू कर दिया था |

हकोका के अंतर्गत नशे के सौदागरों को नहीं मिलेगी आसानी से जमानत

हिमाचल प्रदेश में नशे का व्यापार बढ़ता ही जा रहा है, राज्य का युवा वर्ग इस की चपेट में आता जा रहा है, राज्य सरकार इस को कंट्रोल तो कर रही है लेकिन इस की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि अब प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम लेते हुए मकोका की ही तर्ज पर हिमाचल में हकोका एक्ट के ज़रिये नशा बेचने जैसे अपराधों पर लगाम कसने की तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर ने प्रेस वार्ता में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में बताया है कि मकोका की तर्ज पर हकोका लागू करने पर हिमाचल सरकार विचार कर रही है लेकिन पहले महाराष्ट्र में लागू इस ठोस कानून का अध्ययन कर सरकार हिमाचल का पहला काम हैं, उसी के बाद किसी निर्यण पर पहुंचा जायेगा । उन्होंने ये भी बताया कि हकोका लागू होने के बाद आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिलेगी |

पिछले साल विधानसभा शीत सत्र में विधेयक में पारित, जल्द मिलेगी मंज़ूरी

श्री जयराम ठाकुर जी ने कहा किप्रदेश सरकार ने इससे पहले पिछले साल विधानसभा शीत सत्र के दौरान इस विधेयक को पारित किया था जिसे तत्कालीन राज्यपाल आचार्य देव व्रत की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति को भेजा गया लेकिन अभी तक हकोका की स्वीकृति नहीं मिली। जब तक राज्य सरकार को इस की मंजूरी नहीं मिलती तब तक हिमाचल प्रदेश में यह संशोधित कानून लागू नहीं हो सकता।

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