जिला काँगड़ा बना गिद्दों की ख़ास पसंद, वन्य जीव अधिकारियों में उत्साह

पक्षी प्रेमियों के लिए एक बहुत अच्छी खबर सामने आ रही है, हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव विभाग के प्रयासों से प्रदेश में गिद्दों की संख्या बढ़नी शुरू हो गयी है। विभाग खुश है की गिद्दों के संरक्षण को उसके प्रयासों का नतीजा खास कर जिला कांगड़ा में दिखना शुरू हो गया है। इसी के साथ जिला कांगड़ा में गिद्दों के होने की उम्मीद धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। जिला कांगड़ा में 48 विभ्भिन चिन्हित जगहों पर गिद्दों की संख्या जानने को विभाग हर वर्ष सर्वे करता है। इस वर्ष के सर्वे की रिपोर्ट भी विभाग के पास पहुंच गई है व रिपोर्ट के मुताबिक इस बार गिद्दों के अधिक घोंसले मिले हैं। वन्य जीव विभाग के लिए ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि सिद्ध हुई है ।

कांगड़ा जिले में गिद्दों के होने की उम्मीद बची

गत वर्ष 2018 के सर्वे में विभाग की टीम को विभ्भिन चिन्हित जगहों पर गिद्दों के 356 घोंसलों में कुल 313 चूजे मिले थे। जो कि इस वर्ष सर्वे में आंकड़ा बढ़ गया है। पर्यावरण की दृष्टि से भी यह अच्छा संकेत है। इसके साथ ही विभाग ने ऊना, बिलासपुर और हमीरपुर में गिद्दों की संख्या जानने को सर्वे किया था। लेकिन इन तीनों जिलों में गिद्द 99 फीसदी कम पाए गए थे। ऊना और बिलासपुर में तो एक भी घोंसला नहीं मिला जबकि हमीरपुर में गिद्दों का एक घोंसला मिला था। सूबे के कांगड़ा जिले में गिद्दों के होने की उम्मीद बची है।

वन्य जीव विभाग ने बनाए फीडिंग स्टेशन

गिद्दों की प्रजाति को बचाए रखने के लिए विभाग ने फीडिंग स्टेशन भी बनाए हैं। गिद्द किसी और जगह पलायन तो नहीं कर रहे, यह जानने के लिए विभाग ने गिद्दों में ट्रांसमीटर भी लगाए हैं। वन्य जीव विभाग मंडल हमीरपुर के डीएफओ कृष्ण कुमार ने कहा कि गिद्दों की बढ़ती हुयी संख्या के इतने अच्छे नतीजे उत्साहजनक हैं। इस वर्ष गिद्दों के 387 घोंसले और 352 चूजे मिले हैं। इससे पूर्व वर्ष में 356 घोंसले मिले और 313 चूजे मिले थे। 2017 में गिद्दों के 337 घोंसले और 294 चूजे, 2016 में 307 घोंसले और 280 चूजे, 2015 में गिद्दों के 288 घोंसले और 269 चूजे मिले थे।

ये भी पढ़ें :

दुधारू पशुओं में दूध की क्षमता वाले इंजेक्शन का गिद्दों पर विपरीत असर

दुधारू पशुओं में दूध की क्षमता को बढ़ाने के लिए लगाए जाने वाले इंजेक्शन का गिद्दों पर विपरीत असर पड़ रहा था। जानवर के मरने के बाद गिद्द जब उन्हें खाते तो उस दवा का विपरीत असर उन पर पड़ता है। इससे गिद्दों की मौत हो रही थी। इसी कारण गिद्दों की संख्या घटने लगी थी। जिसका पता चलते ही विभाग ने इसके लिए कमर कस ली थी ।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *