हिमाचल में टमाटर की फसल को लगा बकाई रोट सड़न रोग, सब्जी मंडी में टमाटर की कमी

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हिमाचल राज्य में टमाटर की फसल को बकाई रोट सड़न नामक एक रोग लग गया है। जिसके चलते किसान परेशान दिख रहे हैं। किसान टमाटर की सड़न की बिमारी से बचाने के लिए कई तरह के प्रयास कर चुके हैं। पिछले कुछ दिन से सड़न रोग ने फसल को काफी हद तक नष्ट कर दिया है। जिसके कारण प्रदेश की सभी सब्जी मंडियों में आने वाली टमाटर की भारी कमी दिख रही है।

टमाटर की डिमांड बढ़ने से इसके दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। किसानों से की गई बातचीत के अनुसार पिछले कुछ दिन से फल सड़न रोग बहुत ज्यादा बढ़ गया है। यह टमाटर के आलावा अन्य पौधों में भी फैल रहा है। सड़न रोग के सबसे ज्यादा मामलेजो है वो शिमला, सोलन, ठियोग, कोटखाई में देखने को मिल रहे हैं। कृषि विभाग ने भी किसानों को अपनी फसल को शीघ्र ही इस रोग से बचाने की सलाह दी है। इसके लिए विभाग ने कुछ एक उपचार भी बताए हैं। जो किसान भाई कर रहे हैं।

कैसे करे टमाटर की फसल में सड़न रोग सही ढंग से पहचान?

बकाई रोट भी फल सड़न रोग का अंग है। इसकी पहचान हम टमाटर के फल में बकरे की आंख की तरह निशान से कर सकते है। यदि टमाटर में पीलापन नजर आए तो इससे भी हम इस सड़न रोग का पता लगा सकते है। इस रोग में फसल के पत्ते भी पीले हो जाते हैं। ऐसे में हम इस रोग की पहचान कर सकते हैं।

फसल को सदन रोग से बचाने के लिए प्रयोग में लाए ये तरीके

टमाटर में इस सड़न रोग को दूर करने के लिए फसल में सिंचाई की सही व्यवस्था होना जरुरी है। अगर फल में सड़न रोग लग जाए तो किसान कृषि विशेषज्ञों की सलाह से कीटनाशक का छिड़काव कर सकता है। कृषि विभाग ने बकाई रोट के लगने पर रिडोमिल एम जेड का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। टमाटर में इस रोग का खतरा आम बात है। पर इसका उपचार समय रहते नहीं किया गया तो यह सारी फसल को नष्ट कर सकता है।

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