CM ने कर्मचारियों की पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने से किया इंकार

हिमाचल सरकार अब कर्मचारियों को पहले जैसा पेंशन सुविधा का लाभ नहीं देगी। मुख्यमंत्री ने विधानसभा के इस मानसून सत्र के बीच सदन में ठियोग से माकपा विधायक राकेश सिंघा और मुकेश अग्निहोत्री के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि पुरानी व्यवस्था बहाल नहीं होगी। हिमाचल सरकार इस विषय पर पहले भी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है। बीते वीरवार को सदन में इस मुद्दे पर सीएम ने सरकार को सीधे ही बोल दिया है।

प्रदेश की कुल सालाना आय 10 हजार करोड़ रुपये, वेतन और पेंशन पर सरकार 19 हजार करोड़ रुपये कर रही सालाना खर्च

मुख्यमंत्री ने सदन में इस बात को स्पष्ट किया कि विभिन्न स्रोतों से प्रदेश की सालाना आय कुल 10 हजार करोड़ रुपये ही है, इसके बावजूद सरकार वेतन और पेंशन पर 19 हजार करोड़ रुपये सालाना खर्च कर रही है। इसी कारण सरकार की इच्छा और संवेदना तो कर्मचारियों के साथ है, पर इसके बावजूद वह संसाधनों के आई कमी के चलते इस पर कोई फैसला फिलहाल सही नहीं है।

अगर केंद्र सरकार पेंशन स्कीम बदल देती है तो पेंशन स्कीम प्रदेश में भी लागू होगी : मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर

सदन में राकेश सिंघा ने कहा कि कम से कम 40 फीसदी से ज्यादा दिव्यांग्ता वाले कर्मचारियों को तो पेंशन लाभ मिलना चाहिए। और ऐसे फैसले पर सरकार को पुनःविचार करना चाहिए। इस बात का जबाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल सरकार वेतन के लिए पंजाब और पेंशन के लिए केंद्र सरकार का ही मॉडल फॉलो करती है। यदि केंद्र सरकार पेंशन स्कीम में कोई भी बदलाव करती है तो हिमाचल प्रदेश में उस पेंशन स्कीम को अमल में जाएगा।

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