हिमाचल प्रदेश में बंजर भूमि पर उगने वाले कांटेदार कैक्टस में कमाल के औषधीय गुण : डॉ. तारा सेन ठाकुर

हिमाचल में बंजर भूमि में जो कांटेदार कैक्टस के पौधे उगे है, उन में कमाल के औषधीय गुण हैं। राज्य में छूहीं के नाम से पहचाने जाने वाले इस कैक्टस से जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है। बवासीर नामक बीमारी से भी छुटकारा मिल सकता है।

वल्लभ महाविद्यालय के वनस्पति शास्त्र विभाग के विशेषज्ञों के शोध से हुआ खुलासा

हिमाचल के जिला मंडी के वल्लभ महाविद्यालय के वनस्पति शास्त्र विभाग के विशेषज्ञों के शोध से यह खुलासा हुआ है। यह गहरे जख्म को तेजी से भरने में भी सहायक है। पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की तरफ से मिले एक प्रोजेक्ट के अनुसार शोध के दौरान छूहीं के पौधे में कई औषधीय गुण देखने को मिले हैं। स्थानीय कॉलेज में वनस्पति शास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ तारा सेन ठाकुर द्वारा दिए गए बयान के अनुसार छूहीं कैक्टस से बनने वाले कई तरह के व्यंजन कॉलेज में शोध के अंतर्गत भी तैयार किए गए हैं। इस प्रोजेक्ट की लागत 6.40 लाख रुपये है। इस प्रोजेक्ट पर लगातार दो साल शोध करने के बाद इसे सरकार के संबंधित विभाग को सौंपा जाएगा। अभी प्रोजेक्ट पर काम करते हुए एक साल हुआ है ।

स्थानीय महिलाएं अपना काजल बनाने में कैक्टस का करती है प्रयोग

मिली जानकारी के अनुसार मंडी की महिलाएं छूहीं के दूध का प्रयोग काजल बनाने में भी करती हैं, जो कि नवजात शिशुओं की आंखों की ज्योति बढ़ाता है। और इस तरह वे सब देशी काजल का प्रयोग करती है। वहां के लोग इस पौधे से स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाते है। व्यंजन छूहीं की कोमल शाखाएं के छिलके से बनते हैं। यह यूफोरबियेसी का सदस्य है।

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