तीन तलाक विधेयक पास होने से मुस्लिम समुदाय की खुश, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया श्रेय

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला के मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक विधेयक पास होने से खुशी की लहर आ गई है। तीन तलाक विधेयक पास होने से मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को न्याय भी मिलेगा।  भारत के इतिहास में यह एक ऐतिहासिक निर्णय है। मुस्लिम महिलाएं इसका श्रेय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दे रही हैं। इस विधेयक से मुस्लिम महिलाओं का सम्मान मिलेगा। यह बात बिलासपुर में आरएसएस इकाई मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की सदस्य सुरैइया बेगम ने कही है। उन के बयान के अनुसार इस विधेयक के पास होने से देश भर में मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को एक आजादी का माहौल मिल रहा है, जिस के कारण मुस्लिम महिलाएं पूरे दिल से भारत सरकार का आभार व्यक्त कर रही हैं ।

असीफा खान ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक दिन, फरहीन खान ने किया तीन तलाक विधेयक पास होने के निर्णय का स्वागत

फरहीन खान ने अपने बयान में कहा कि तीन तलाक विधेयक के पास होने के निर्णय का स्वागत है। यह केंद्र सरकार की महिला को अधिकार दिलाने के प्रयास की जीत है। यह फैसला मुस्लिम महिलाओं की आजादी और उनके अधिकारों के संरक्षण की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा उठाया गया ऐतिहासिक कदम है।

असीफा खान ने भी कहा कि यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। दोनों सदनों ने ही मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाया है। यह बदलते हुए भारत की शुरूआत है।अपनी ख़ुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं व मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संस्थापक डॉ इंद्रेश कुमार के प्रयासों से तीन तलाक की प्रथा समाप्त हो पाई है। जिस से मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिला है।

आज देश की मुस्लिम महिलाओं को जीने का हक मिला : तसलीम खान

तसलीम खान के अनुसार आज देश की मुस्लिम महिलाओं को जीने का असली हक मिला है। इसमें करोड़ों मुस्लिम माताओं,बहनों और बेटियों की जीत हुई है। उन्हें सच में सम्मान से जीने का हक मिला है। इस तरह तत्काल तीन तलाक बिल का पास होना, महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक बहुत ही बड़ा कदम है।

तीन तलाक का अपराध सिद्ध होने पर संबंधित पति को तीन साल तक की सजा : सुरैइया बेगम

इसी बात पर सुरैइया बेगम ने कहा कि सांसद ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक देने की प्रथा पर रोक लगाने की जो मंजूरी दी है वह बहुत ही महत्वपूर्ण है। और साथ ही तीन तलाक का अपराध सिद्ध होने पर संबंधित पति को तीन साल तक की सजा का मिलेगी। इसके पास होने से मुस्लिम महिलाओं को सम्मान से जीने का सही हक मिला है।

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