ऊना के शहीद बृजेश कुमार को सेना ने दिया शौर्य चक्र लेकिन, सरकार पूरा नहीं कर सकी अपने वायदे

राज्य जम्मू-कश्मीर के राजौरी में आतंकियों के साथ लोहा लेते हुए ऊना जिला के ननांवी गांव के शहीद बृजेश कुमार को सेना द्वारा शौर्य चक्र दिया गया है। लेकिन, हिमाचल प्रदेश की सरकार ने दस माह के बाद भी अपने वायदे को पूरा नहीं किया है। सरकार ने बृजेश की शहादत पर उनकी पत्नी श्वेता देवी को सरकारी नौकरी, 25 लाख और साथ ही गांव में शहीद के नाम पर प्रवेश द्वार बनाने का आश्वाशन दिया था लेकिन अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं किया गया है।

श्वेता के कंधों पर छह साल की बेटी कनिका तथा दो माह की शामली का पालन पोषण का सारा जिम्मा

बृजेश की शहादत के दौरान उसकी पत्नी श्वेता गर्भवती थीं। इस कारण उन्हें सरकारी औपचारिताएं पूरी करने का समय नहीं मिल पाया, लेकिन सरकार और प्रशासन ने भी इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया। अगर वे चाहते घर आकर भी ये सब औपचारिकताएं पूरी कर सकते थे। श्वेता के कंधों पर छह साल की बेटी कनिका तथा दो माह की शामली का पालन पोषण का जिम्मा है। शहीद की पत्नी ने कहा कि पति की कमी तो सारी उम्र खलती रहेगी, परन्तु परिवार और क्षेत्र के लोगों को उनकी कुर्बानी हमेशा के लिए यादगार बनी रहेगी। साथ में श्वेता ने कहा कि उनको सेना द्वारा पति को शौर्य चक्कर देने की सूचना मीडिया से मिली है।

शहीद के गांव के लोगों ने गांव के प्रवेश द्वार पर शीघ्र स्मारक बनाने की प्रदेश सरकार से की मांग

कैप्टन गुरदास राम, ज्योति शर्मा, विजय कुमार, उपप्रधान विधि चंद, रमेश चंद, जगदीश चंद, राज कुमार ने अपने बयान में कहा कि गांव के लिए बृजेश प्रवेश द्वार बनाने की घोषणा मंत्री वीरेंद्र कंवर ने की तो थी पर अभी तक इस विषय में सरकार द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया है। गांव के लोगों ने गांव के प्रवेश द्वार पर जल्दी स्मारक बनाने की मांग प्रदेश सरकार से की है। इस बात को लेकर लोगों में आक्रोश भी है।

The army gave the bravery cycle to Una’s martyr Brijesh Kumar, but the government could not fulfill its promises

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