हिमाचल में घास प्रजाति का फॉक्सटेल मिल्लेट (बाजरा) अब चावल का विकल्प, कैंसर-दिल के रोगों से करेगा बचाव

हिमाचल में घास प्रजाति का फॉक्सटेल मिल्लेट जोकि औषधीय गुणों से भरपूर है, अब चावल का विकल्प बनेगा। जिस वजह से यह बासमती चावल से भी महंगा होगा। चावल के रूप में इसका प्रयोग करने से किसी तरह की बीमारी का दर नहीं होगा।

हर उम्र के लोगों के लिए ये चावल लाभदायक, कई बड़े रोगो से लड़ने के लिए प्रयोगकारी

इन चावलों का आप किसी भी उम्र में सेवन से न केवल आप सवस्थ होने के साथ ही, इसमें पाए जाने वाले माइक्रो न्यूट्रेंट कैंसर, अस्थमा और दिल के रोगों से लड़ने के लिए कारगर भी होंगे। कृषि विभाग ने पुरानी कृषि योजना के अतंर्गत प्राचीन काउणी की व्यावसायिक खेती के लिए सफल ट्रायल कृषि विज्ञान केंद्र बजौरा में किया गया।

मैग्नीशियम और पोटाशियम कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करते है जोकि हमें दिल की बीमारियों से बचाता है

डॉ. चंद्रकांता वत्स ने कहा है कि फॉक्सटेल मिल्लेट को स्थानीय भाषा में काउणी कहा जाता है। इसके शोध में पाया गया है कि इसमें कई पोषक तत्व हैं, जो माइक्रो न्यूट्रीएंटस में आते हैं। इनमें मैग्नीशियम, कैल्शियम, मैग्नीज, फास्फोरस, फाइबर (रेशा), विटामिन बी और एंटी ऑक्सीडेंट जैसे तत्व भी पाए जाते हैं। यह चावल मैग्नीशियम और पोटाशियम का एक अच्छा स्रोत है जो कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करते है जोकि हमें दिल की बीमारियों से बचाता है।

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