मैनेजर की नौकरी छोड़कर अजय ने बकरी पालन के व्यवसाय को चुना, हजारों बेरोजगार युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत

ऊना जिले के कुटलैहड़ क्षेत्र के कठोह के रहने वाले अजय जसवाल हजारों बेरोजगार नौजवानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। अजय ने ब्रिटानिया सरीखी कंपनी से मैनेजर की नौकरी छोड़कर बकरी पालन के व्यवसाय चुना। पिता के देहांत के बाद नौकरी छोड़ कर अजय ने मार्च 2019 में बंगाणा पशु पालन विभाग से संपर्क किया। जिसमें उन्हें बकरी पालन के बारे में जानकारी दी गई, आज कठोह निवासी अजय जसवाल का लगभग साढ़े 12 कनाल में बकरियों का फार्म है।

अजय के पास हैं बीटल नस्ल की बकरियां, लगभग 40 बकरियां और 8 बकरे

अजय ने फार्म में 40 बकरियां और 8 बकरे रखे हैं, इनके पास बीटल नस्ल की बकरियां है। यह बीटल बकरी की सबसे टॉप की नस्ल मानी जाती है। जसवाल का फार्म देखने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। अजय के एक बकरे की कीमत 20 से 30 हजार रुपये है। अजय के अनुसार पशु पालन विभाग ने बकरी पालन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही दवाइयां और खुराक भी दी। अजय अपने फार्म में अजोला उगा रहे हैं। साथ ही सहजन के 20 पौधे भी लगा रखे हैं, ये सब पशुओं के लिए जबरदस्त खुराक है।

गाय या भैंस के दूध की तुलना में बकरी का दूध काफी ऊंचे दाम, दूध की मांग भी ज्यादा

हिमाचल के पशु पालन मंत्री वीरेंद्र कंवर का कहना है कि इस वर्ष सरकार बकरी पालन पर 20 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। इस सब के पीछे का कारण बकरी के दूध की बाजार में अच्छी मांग है, गाय या भैंस के दूध की तुलना में बकरी का दूध काफी ऊंचे दाम पर बिकता है। इसी वजह से बकरी पालन पर जोर दिया जा रहा है।