हिमाचल प्रदेश का चमत्कारी शंकर भगवान को समर्पित बिजली महादेव मंदिर, Bijli Mahadev Temple dedicated to Shankar God in Hindi

हिमाचल के कुल्लू जिले में स्तिथ यह एक धार्मिक स्थान है। जो हिन्दुओं का पवित्र तीर्थस्थल हैं। यह धार्मिक स्थान कुल्लू घाटी में व्यास नदी के किनारे स्तिथ है। यह मंदिर भारत के प्राचीन मंदिरो में से एक है। इस मंदिर की ऊंचाई समुंद्रतल से 2670 मीटर है। इस मंदिर से कुल्लू और पार्वती का बहुत ही खूबसूरत दृश्य देखने को मिलता है। बिजली महादेव मंदिर की ऊंचाई 60 फ़िट है। यह मंदिर पहाड़ी के ऊपर स्तिथ है। सूरज की किरणे पड़ते ही इस मंदिर का दृश्य बहुत अद्भुत नजर आता है।

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कुल्लू घाटी में भगवान शिव की 12 उपस्थिति है। यह मंदिर कुल्लू जिले से 12 किलोमीटर दुरी में स्तिथ है। इस मंदिर में पहुंचने के लिए 3 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करना पड़ता है। रास्ते में बहुत से काव्यात्मक सुंदरता से संपन्न घाटी के दृश्य बहुत ही मनमोहक है। जो प्रकृति के सौंदर्य के साथ भरा हुआ है।

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पौराणिक कथा के अनुसार, According to Mythological

इस मंदिर में एक शिवलिंग स्थापित है। जिस पर हर साल बिजली पड़ती है। जिसके बजह से यह शिवलिंग घंडित हो जाता है। जिसे यहां के पुजारी ने घी और मक्खन के सात जोड़ा था। जो बाद में रहस्मई रूप ठोस हो गया है। कहा जाता है की पहले यहां कुलान्त नाम का राक्षस रहता था। इस राक्षस ने अजगर का रूप धारण क्र लिया था और यह और यह कुंडली मार क्र व्यास नदी के परवाह को रोक कर इस स्थान को पानी में डूबना चाहता था। कुलान्त चाहता था की यहां रह रहे सभी जिव जंतु मर जाए। राक्षस कुलान्त के इस विचार से शिव भगवान चिंतित हो गए और उन्होंने कुलान्त को अपने आश्वासन में लिया और कहा की उस की पंच में आग लग गई है।

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धार्मिक और पवित्र स्थान, Religious and holy place,

यह सुनते ही कुलान्त पीछे की और पूंछ देखने के लिए मुडा और शिव भगवान द्वारा मारा गया। कुलान्त के मरते ही उस के शरीर के अंग जहा-जहा गिरे वो स्थान पहाड़ के रूप में बदल गया। इन स्थान को पवित्र करने के लिए शिव भगवान ने इंद्र भगवान् को यहां 12 सालो में एक बार बिजली गिराने को कहा। उस के बाद यहां बिजली गिरना शुरू हो गई और शिवलिंग बिजली के कारण चकनाचूर हो जाता है। और फिर मंदिर का पुजारी शिवलिंग को घी और मख्खन से दुबारा निर्मत कर दिया जाता है। इसी बजह से इस मंदिर का नाम बिजली महादेव मंदिर पड़ गया और यहां हर साल बहुत बड़ी मात्रा में श्रदालु दर्शन के लिए आते है।