Himachal Pradesh में प्रसिद्ध चामुंडा देवी मंदिर जी का पौराणिक स्थान ऐतिहासिक मंदिर

Chamunda Devi Temple हिन्दुओं का एक धार्मिक स्थान है, जो Kangra District में स्थित एक पौराणिक मंदिरो में से एक है। यह मंदिर Kangra से (16.5 km) किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां वर्ष भर श्रद्धलुओं की भीड़ लगी रहती है। इस मंदिर को चामुंडेश्वरी व चरचिका और रक्त काली के रूप से भी जाना जाता है। इस प्रवित्र स्थान में पहुंचने के लिए आप Dharamshala से बस से या फिर Taxi का प्रयोग कर सकते है। जिस से आप को यहां पहुंचने में काफी आसानी होगी।

कहां से कितना दूर व् आस-पास के दृश्य

यह स्थान Palampur से 10 किलोमीटर की दुरी पर है। इस मंदिर के किनारे एक छोटी सहायक नदी बानर नदी बहती है। जिस का दृश्य यहां आये पर्टयकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां आये श्रद्धलुओं को लंगर की सुविधा, मंदिर कमेटी की तरफ से उपलब्ध करवाई जाती है। जिस का यहां आये श्रदालु बेहद आनंद लेते है। इस मंदिर के साथ ही बहुत सी दुकाने भी उपलब्ध है। इन दुकानों में हर प्रकार की वस्तुएं मिलती है।

मंदिर परिसर के साथ ही में काफी खाने पीने की दुकाने स्थित है,यहां श्रद्वालु खान पान कर सकते है। पौराणिक कथा के अनुसार यह ऐतिहासिक मंदिर 16 वीं शताब्दी का माना जाता है। यह धार्मिक मंदिर माँ चामुंडा देवी को समर्पित है। जो देवी दुर्गा शक्ति का एक रूप है। यहां के निवासियों का यह मानना है की इस स्थान में भगवान शिव और शक्ति का निवास है स्थान है।

सच्चे मन से आने वालों की होती हैं सभी मनोकामनाएं पूर्ण

इसी वजह से यह मंदिर नंदिकेश्वर धाम’ के नाम से भी लोकप्रिय है। माँ चामुंडा जी को माँ दुर्गा जी का क्रोधी रूप माना जाता है। परन्तु जो भी श्रदालु सच्चे मन से यहां दर्शन के लिए आता है देवी उस की सभी मनोकामनाए पूर्ण करती है।

इस मंदिर का नाम चंदा’ और ‘मुंडा राक्षसों के नाम से पर रखा गया है। पौराणिक कथा के अनुसार इस स्थान पर माँ दुर्गा ने एक देवी को अपनी दिव्य शक्तियो से एक देवी को जन्म दिया था। इस देवी ने देवी दुर्गा से मिली शक्तियो से राक्षस चंदा और मुंडा का वध कर दिया था। देवी से प्रसन हो कर दुर्गा माँ ने देवी को यह वरदान दिया की उन को चामुंडा के नाम से जाना जाएगा और उन की इस स्थान में पूजा की जायगी।

तभी से इस मंदिर में चामुंडा देवी जी की पूजा अर्चना होती है और यहां हर साल भारी मात्रा में श्रदालु आते हैं। भगवान भैरव और राम भगत हनुमान जी को माँ चामुंडा का रक्षक माना जाता है। इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर इन की प्रतिमाये बिराजमान है। यह तीर्थस्थल बहुत ही लोकप्रिय है।

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