वॉर मेमोरियल, राज्य युद्ध संग्रहालय, State War Museum, War Memorial Dharamshala

War Memorial Dharamshala

हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले के धर्मशाला में एक लोकप्रिय शहीदों की याद में बनाया गया एक युद्ध स्मारक है। जो यहां आये पर्टयकों का आकर्षण का केंद्र है। हिमाचल को वीरों की भूमि के नाम से भी जाना जाता है। जिस का अहम कारण यह है, की बहुत से हिमाचल के वीरो ने रण भूमि में में दुश्मनो को शौर्य और बहादुरी के था पराजित किया है। फिर चाहे वो 1962 का चीन-भारतीय युद्ध हो, 1965 भारत का पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध हो, या फिर 1971 का युद्ध, या 1999 में हुआ सबसे कारगिल का युद्ध हो, हिमाचल के वीरो से हर युद में अपना अदम्य साहस और अपनी वीरता का बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया है।

वीरों को समर्पित है ये स्थल

हिमाचल के वीरों की बात की जाए तो बहुत से वीरों ने अपने भारत के लिए सहादत दी है। मगर आज हम आप को ऐसे वीर के बारे में बताने जा रहे है। जिन ने हिमाचल की देव भूमि में जन्म लिया, जो बल्कि हिमाचल के ही नहीं पुरे भारत के पहले वीर है। जिन्हे परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया, इस वीर का नाम है,  मेजर सोमनाथ शर्मा इन्हे भारत सरकार के द्वारा मरणोपरान्त परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। परमवीर चक्र पाने वाले वे भारत के प्रथम व्यक्ति हैं। ऐसे ही बहुत से हिमाचली वीरो ने देश के लिए अपना बलिदान दिया है, जिन को श्रद्धांजलि देने के लिए इस स्मारक का निर्माण हुआ।

यहां एक बहुत बड़ी दीवार स्तिथ है,जिस के ऊपर बहुत से खूबसूरती से नक्काशी की गई है जो ये शिलालेख प्रदर्शित करती हैं। इन शिलालेख पर वीरो के नाम हमेशा के लिए कलाकृति के साथ लिखे गए है। यह स्मारक धर्मशाला शहर में एक स्तिथ एक स्थान है, जो घने पेड़ों के बिच में स्तिथ है,स्मारक के चारो और प्रकृति का सौंदर्य इस स्मारक को और भी ज्यादा सुंदरता से भर देता है। यह स्थान यहां आये पर्टयकों का पसंदीदा स्थान है। यह स्थान धर्मशाला की चहल पहल के बिच में स्तिथ शांति और स्कून भरा स्थान है। धर्मशाला में युद्ध स्मारक काले पत्थर के तीन विशाल पैनलों से बना हुआ एक कलाकृति का रूप है, प्रत्येक पैनल की ऊंचाई 24 फिट है।

धर्मशाला में विकसित हुआ राज्य युद्ध संग्रहालय से सम्बंदित महत्वपूर्ण रोचक जानकारी, Important interesting information related to the State War Museum developed in Dharamshala

हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले में स्तिथ हिमचाल की दूसरी Capital Dharmshala में राज्य युद्ध स्मारक का निर्माण कार्य पूरा हो चूका है।  भातीय वायुसेना के एयर वाइस मार्शल एके नाभ ने युद्ध संग्रहालय का दौरा किया साथ ही उन्होंने यहां हुई प्रेजेंटेशन में भी भाग लिया । इस दौरे के अनुसार एयर वाइस मार्शल एके नाभ ने राज्य शहीद स्मारक समिति को यह आश्वासन दिया की भातीय वायुसेना की तरफ से उन की हर प्रकार से सहायता की जायगी। यह युद्ध स्मारक संग्रहालय दिल्ली के इंडिया गेट में बन रहे युद्ध संग्रहालय की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।

इस दौरान राज्य शहीद स्मारक समिति ने एयर वाइस मार्शल एके नाभ के समक्ष युद्ध स्मारक से संबंधित बहुत सी मांगो को उठाया गया,जिन में बहुत सी मांगे संग्रहालय को और विकसित बनाने और नई कलाकृतियों से समबन्दित थे। एयर वाइस मार्शल एके नाभ ने उठाई गी मांगो के दौरान स्मारक समिति को यह आश्वासन दिया की इस संग्रहालय को इंडिया गेट में बन रहे युद्ध संग्रहालय का मॉडल मुहैया करवाया जाएगा, जिस से शहीद स्मारक समिति को मॉडल के अनुरूप आवस्य्क्ता पड़ने पर वायुसेना सुविधाये  सुनिश्चित की जा सके। एयर वाइस मार्शल ने यह भी आश्वासन दिया की वह आवश्यकता पड़ने पर इंडिया गेट युद्ध संग्रहालय में कार्य और निर्माण में लगे Engineer और ठेकेदारों जिन के द्वारा मॉडल त्यार किया गया है उन को भी धर्मशाला भेजा जायेगा जिस से मॉडल को समझने में आसानी होंगी।

15 अगस्त 2018 को प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी ने किया था उदघाटन

इसके साथ ही इंडिया गेट में स्थित युद्ध संग्रहालय का उद्घाटन 15 अगस्त 2018 को प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी द्वारा किया गया। साथ ही उन्होंने समिति को यह भी आश्वासन दिया की उन को संग्रहालय को अलग स्वरूप देने और आकर्षित करने के लिए वायुसेना से जुड़े दुर्लभ फोटोग्राफ्स, सैन्य एयर मॉडल था। सैन्य साजो-सामान व एतिहासिक महत्व की वस्तुएं उपलब्ध करवाई जायगी। तथा शहीद स्मारक समिति  को कीमती उपकरणों के लिए धनराशि मुहैया करवाई जाएगी।

एयर वाइस मार्शल एके नाभ ने सर्वप्रथम 2190 वर्गमीटर के कुल क्षेत्रफल में फैले संग्रहालय का मुआइना किया,तथा संग्रहालय में किए गए कार्यो की सराहना की। उन्होंने यहां की सुंदरता को निहारते हुए यह भी कहा की जब संग्रहालय का कार्य पूरा हो जायगा, यहां का दृश्य और भी खूबसूरत हो जायगा। उन्होंने धौलाधार की पहाड़ियों के बिच में स्तिथ इस स्थान के बारे में यह भी कहा की इस संग्रहालय का कार्य पूर्ण होते ही यह भारत में स्तिथ अन्य संग्रहालयो से बेहद अच्छा होगा।

 राज्य शहीद स्मारक समिति द्वारा एयर वाइस मार्शल के समक्ष रखी गई मांगें

प्रेजेंटेशन के दौरान ब्रिगेडियर एसके पाठक द्वारा भारतीय वायुसेना के एयर वाइस मार्शल के समक्ष राज्य युद्ध संग्रहालय में बहुत सी मांगे रखी गयी जिस में वायुसेना में शहीद हुए शहीदों के पुतले, एयर मैन स्टेच्यू, गरुड़ कमाडो के चित्र तथा इन से सम्बंदित अन्य उपकरण, ऑपरेशनल यूनिफॉर्म जो एक सैनिक पहनता है। एयरक्राफ्ट, प्रथम विश्व युद्ध में वायुसेना के उपयोग किए गए हथियार, अटेकिंग हेलीकॉप्टर व इंजीनियरिंग से सम्बंदित उपकरणों को उपलब्ध करवाने की मांग की, उन्होंने वायुसेना के इतिहास से संबंधित पुस्तकें, मैगेजीन, ऑडियो-वीडियो सहित अन्य इतिहास से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करवाने का भी प्रस्ताव रखा। जिस से यहां आये पर्टयकों स्टूडेंट्स और आने वाली युवा पीड़ी को जानकारी उपलब्ध करवाई जा सके।

कौन-कौन रहे मौजूद,Who all are present

यहां हुई सभा में विभिन्न विभागों के अधिकारियो ने इस में हिस्सा लिया। काँगड़ा जिले के अतिरिक्त दंडाधिकारी मस्त राम भारद्वाज, धर्मशाला के एसडीएम धर्मेश रमोत्रा,कमाडेट होमगार्ड मेजर विकास सकलानी, कमांडर 33 माउंट ब्रिगेड के ब्रिगेडियर नवदीप बराड़, तथा सैनिक कल्याण विभाग के उपनिदेशक सेवानिवृत्त स्क्वाड्रन लीडर मनोज राणा, सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियो ने इस में हिस्सा लिया।

वॉर मेमोरियल (युद्ध स्मारक) धर्मशाला का समय शुल्क और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी,(War Memorial) Dharamshala’s time fee and other important information

यह स्मारक धर्मशाला बस स्टॉप से केवल 2 किलोमीटर की दुरी पर स्तिथ है अगर आप काँगड़ा से आ रहे हो तो आप बस या टैक्सी  के द्वारा इस स्थान पर पहुंच सकते हो। यह स्थान काँगड़ा बस स्टैंड से केवल 17 किलोमीटर की दुरी पर स्तिथ है। इस स्मारक के अंदर प्रवेश करने का शुल्क यदि आप भारतीय हो तो आप को केवल 10 RS में आप को प्रवेश के लिए टिकट लेनी होंगे और यदि आप भारत के निवासी नहीं हो तो आप को 50 RS आप की टिकट होंगी। इस के बाद आप स्मारक में टहल सकते है। और यहां पर स्तिथ भारतीय सेना से सम्बंदित वस्तुओ का निरीक्षण क्र सकते है। यहां आये पर्टयकों के लिए पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध है।

स्मारक के खुलने का समय,Opening timings for Dharamsala war मेमोरियल

यह स्मारक सप्ताह के सातो दिन खुला रहता है। आप किसी भी दिन यहां गुमने के लिए आ सकते हो। स्मारक सुबह 9:00 AM पर खुलता है तथा रात्रि के 7:00 PM पर बंद होता है। यहां आ कर आप प्रकर्ति का आंनद ले सकते है। यह स्मारक बहुत ही शांत और मनमोहक है। स्मारक के अंदर बहुत से फोटो पॉइंट है। जहा आप अपने यादो को कैमरे में कैद कर के रेख सकते हो। इस स्मारक के अंदर एक छोटा सा तालाब है। जिस के अंदर रंग बिरंगी मछलिया पाई जाती है। स्मारक के अंदर युद्ध में प्रयोग हुआ  वायु यान भी है। जिसे आप निहार सकते है।

स्मारक समिति द्वारा पर्टयकों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधा, Facility provided by memorial committee to visitors

यह स्मारक सिटी के बिच में होने की बजह से यहां पर्टयकों का आना जाना लगा रहता है। देश विदेश से यहां पर्टयक यहां आते है। इस लिए यहां पर सुरक्षा के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस को भी तैनात किया गया है। प्रशाशन द्वारा भी एक प्रकार की सुभीधा दी जाती है। समिति द्वारा पर्टयकों को पिने के पानी, शौचालय, लाकर्स / भंडारण, जैसे सेवाये उपलब्ध करवाई जाती है। यहां पर्टयकों को कैमरा और वीडियो बनाने की अनुमति है। पर्टयकों को खरीदने के लिए भोजन उपलब्ध है। स्मारक के साथ में ही बहुत से होटल और कैफ़े है। जहा पर रुका औरखान पान किया जा सकता है। स्मारक गुमने के लिए समय पर्टयक अपने हिसाब से तय क्र सकता है। पर्टयक सुबह  से शाम तक कभी भी यहां आ सकते हैं।

वॉर मेमोरियल धर्मशाला में दिखेगी प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध की शौर्य गाथा की झलक,War Memorial Dharamshala will be seen in the gallantry of the First and Second World War

हिमाचल प्रदेश में काँगड़ा जिले के धर्मशाला में स्तिथ वॉर मेमोरियल में अब पर्टयकों के साथ यहां के निवासी भी प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध की शौर्य गाथा के बारे में जान व युद्ध से समबन्दित उपकरणों को देख सकेंगे। यह युद्ध बहुत ही भयानक था। जिस में ना जाने कितने देशो के सैनिको ने सहादत दी थी। पहला विश्व युद्ध 28 जुलाई 1914 से 1919 तक चला था। यह भीषण युद्ध यूरोप, एशिया और अफ्रीका तीन महाद्वीपों के जल, थल और आकाश में लड़ा गया था।THE GREAT WAR के नाम से भी जाना जाता है।

इसमें इस युद्ध में 37 देशों ने प्के सैनिको ने भाग लिया था। और द्वितीय विश्व युद्ध 1939-45 में हुआ था। इस युद्ध में 40,000,000-50,000,000 मौतें हुई थी, जो अब तक का सबसे बड़ा युद्ध माना जाता है। वॉर मेमोरियल धर्मशाला में स्थापित युद्ध संग्रहालय में पर्टयकों को इन युद्धों की जानकारी व युद्ध से सम्बंदित रोचक तथ्यों से रूबरू करवाया जायेगा।

यह संग्रहालय भारत की शौर्य गाथाओं का प्रत्यक्ष प्रमाण देगा। संग्रहालय में सैनिकों के पुतले, व युद्ध में प्रयोग हुए हथियारो को भी पर्टयक निहार सकेंगे। संग्रहालय में अलग अलग से प्रकार के हथियारो को लाया गया है। जिसे पर्टयक देख पायंगे। सैनिक कल्याण बोर्ड के उपनिदेशक स्क्वाड्रन लीडर मनोज राणा ने बताया कि यहां जलबलपुर, नई दिल्ली से लाए जा रहे हथियार और अन्य सामान धर्मशाला पहुंच गया है। युद्ध संग्रहालय में जल्द भारत की तीनों सेनाओं से लाए गए हथियारों, विमान मॉडल, मैनक्विंस, कॉफी टेबल बुक और अन्य सॉफ्ट कॉपियों को सजा दिया जाएगा।

यह हथियार वीरो की विजय गाथा की झलक दिखायगे।

संग्रहालय में  भारतीय सेना के विजयंता टैंक को भी रखा जाएगा, जिसके लिए प्लेटफार्म और संयुक्त भव्य गेट बनाया जाएगा। इससे पहले संग्रहालय परिसर में वायुसेना से मिले एचपीटी-32 और चैरिट क्राफ्ट्स तथा जलसेना के पोपेलर और एंकर को स्थापित किया जा रहा है। देश की थल, जल और वायु सेना से जुड़े फोटो को भी संग्रहालय में सजाया जायेगा। यहां आने वाले सैलानियों को हर प्रकार के हथियार की  खासियत और इन से सम्बंदित जानकारी उपलब्ध करवाई जायगी। जो यहां आये छात्रो और पर्टयकों को उपलब्ध करवाई जायगी।