अघंजर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक लोकप्रिय और प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थल, Aghanjar Mahadev Temple is a popular and famous religious shrine dedicated to Lord Shiva

हिमाचल प्रदेश को देवी देवताओ की भूमि कहा जाता है यहां बहुत से धार्मिक मंदिर और तीर्थस्थल है। जो बेहद प्रसिद्ध और लोकप्रिय पर्टयक स्थान भी है, जो बहुत ही पूजनीय है। यह धार्मिक स्थान खनियारा नाम से प्रसिद्ध एक गांव के निकट स्तिथ है। यह बहुत ही प्राचीन मंदिर है। यह धार्मिक स्थल धर्मशाला से करीब 18 किलोमीटर की दुरी पर स्तिथ है। धौलीधार की तलहटी में बसे खनियारा गांव में शिव भक्तों की टोलियां उनके दर्शन के लिए हर साल बहुत से सैलानी यहां गुमने के लिए आते है।

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महाभारत से संबंदित, Related to Mahabharata

यह मंदिर अघंजर महादेव के नाम से मशहूर और प्रसिद्ध मंदिर है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर की स्थापना महाभारतकालीन है। दंत कथाओं के मुताबिक खनियारा गांव में महाभारत के बराह पर्व में अर्जुन ने भगवान शिव से जहां पशुपति अस्त्र प्राप्त किया था। यह मंदिर धौलाधार की पहाड़ी के किनारे ही स्तिथ है जो ऊँचे-ऊँचे पहाड़ो का बहुत ही अद्भुत दृश्य प्रदान करता है। यह स्थान प्रकृति के सौंदर्य से भरा पड़ा है जो यहां आये पर्टयकों को अपनी और आकर्षित करता है।

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लगभग 500 साल से भी पुराना है यह मंदिर, This temple is more than 500 years old

बराह वर्ष के दौरान अज्ञातवास के दौरान अर्जुन ने तत्कालीन जंगल और आज के खनियारा गांव में पशुपति अस्त्र प्राप्त करने के लिए एक ओर जहां गुप्तेश्वर महादेव की स्थापना की थी। अर्जुन ने राज-पाठ भोगने के बाद वन पर्व के समय हिमालय पर्वत की यात्रा करते हुए इसी स्थान पर दोबारा गुप्तेश्वर महादेव के दर्शन किए और महावीर अर्जुन के कहने पर इसी स्थान पर पांडवों ने दोबारा भगवान महादेव का अघंजर नाम से मंदिर तैयार किया। और यहां पूजा पाठ करने लगे। यह मंदिर लगभग 500 साल से भी पुराना मंदिर है।

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300 वर्ष पुराने शिलालेखों का वर्णन, Description of 300 year old inscriptions

इस मंदिर में स्तिथ पुजारियों के मुताबिक अघंजर महादेव का मतलब है। आघन का अर्थ है पाप और अंजर का अर्थ होता है नष्ट हो जाना। जैसा पांडवों ने महाभारत के युद्ध में अपने गुरुओं, भाइयों और पूर्वजों का संहार किया था। पांडव इसी पाप से मुक्त होना चाहते थे। जिस बजह से इस मंदिर का निर्माण हुआ था। इस मंदिर के साथ यहीं के एक गुफा में गुप्तेश्वर महादेव के भी दर्शन होते हैं। जिसका वर्णन 300 वर्ष पुराने शिलालेखों में मिलता है। यदि आप भी धर्मशाला गुमने के लिए आरहे है तो इस स्थान में जाना ना भूले यह मंदिर एक छोटी मांझी नाम से प्रसिद्ध नदी के किनारे ही स्तिथ है।