बेरिंग नाग हिन्दुओ और बौद्ध का मंदिर, Bering Nag Hindu and Buddhist temple in Sangla valley of Kinnaur

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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्तिथ यह बहुत ही पवित्र और पूजनीय धार्मिक स्थान है। यह मंदिर नाग देवता को समर्पित है, सांगला घाटी और गांव का अपना अलग ही आकर्षण है। यह खूबसूरत सांगला गांव बास्पा नदी के किनारे स्तिथ दाएं किनारे पर बसा है। इस घाटी की ऊंचाई समुद्रतल से लगभग 2621 मीटर है। सांगला गांव के मध्य में गांव के ऊपर की ओर बेंरिंग नाग मंदिर है। और नीचे की ओर महायान बौद्ध विहार कुनगा छोलिंग स्थित है। इस मंदिर को नया रूप दिया गया है। लेकिन नाग देवता यहां सदियों से रह रहे हैं।

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लकड़ी के बड़े खंभों के ऊपर निर्मित यह धार्मिक स्थान, This religious place built on large wooden pillars

यह धार्मिक मंदिर एक चबूतरे पर लकड़ी के बड़े खंभों के ऊपर निर्मित किया गया है। इस मंदिर के चारों तरफ लकड़ी और पत्थर के ऊपर सुंदर नक्काशी की गयी है। जो इस मंदिर को और भी ज्यादा आकर्षित और खूबसूरत बनाती है। बेरिंग नाग का रथांग विशाल (रथ) है। पुजारी इसकी दोनों समय उसकी पूजा करता है। और मेले और त्यौहार के अवसर पर रथांग को सजाकर ‘शू कोठी’ में रखा जाता है।

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इस मंदिर में अधिकतर घर किन्नौरी परम्परागत शैली में निर्मित है, यह घर जो मंदिरों की तरह प्रतीत होते है। इस मंदिर का निर्माण पैगोडा शैली में किया गया है। इस मंदिर का मुख्य कक्ष आयताकार है। इस मंदिर में नाग सहित कई अन्य देवी-देवताओं की 17 प्रतिमाएं प्रतिष्ठित रहती है।

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दरवाजे के भीतर एक विशाल धर्मचक्र ‘दूडयूर‘ स्थापित, A huge Dharmachakra ‘Doodyur’ was installed inside the door

यहां पर स्तिथ बौद्ध मठ भी पैगोडा शैली का विशिष्ट उदाहरण है। दोनों मंदिर एक जैसे दिखाई देते है। इसके दो प्रवेश द्वार होते है । बाहर परिक्रमा पथ पर चहुँ ओर चौरासी ताम्र्चाक्र लगे हुए है। इन प्रत्येक द्वार में ‘ऊँ मणि पदमे हूँ’ लिखा होता है। यहां आये श्रदालु परिक्रमा करते हुए इन्हें घुमाते जाते है। जो आस्था का प्रतीक माना जाता है।

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मठ के बायीं ओर के दरवाजे के भीतर एक विशाल धर्मचक्र ‘दूडयूर‘ स्थापित किया गया है, जिसे एक विशेष प्रकार के रस्से से घुमाया जाता है। मठ के साथ कक्ष में भगवान बुद्ध की भव्य प्रतिमा स्थापित है, जिसके बाहर सोने की पालिश की हुई है, यहां की दीवारों में भगवान बुद्ध से सम्बन्धित जन्म से अंत तक की कथा को उकेरा गया है। मठ की छत में सांप की आकृतिया चित्रित है ।

सांगला घाटी की खूबसूरत वादियों में स्तिथ यह धार्मिक स्थान, This religious place in the beautiful plains of Sangla Valley

सांगला घाटी में स्तिथ यह दोनों धार्मिक स्थान सांगला गाँव के रिहाईशी घरो से घिरे हुए है। इस घाटी की ख़ास बात यह है की यहां आज के समय में धर्म को ले कर के विवाद हो रहे है, वही दूसरी ओर इस घाटी में हिन्दू और बौद्ध मंदिर साथ-साथ स्तिथ है, इस धार्मिक स्थानों में दोनों धर्मो का संगम एक साथ देखा जा सकता है। यदि कभी किसी कारण वश बौद्ध गोम्पा का लामा पुजारी कहीं बाहर किसी कार्य से जाता है, तो नाग मंदिर का पुजारी वहां पूजा करता है।

दो धर्म के संगम का जीता जगता उदाहरण, Live example of the confluence of two religions

यह सच में पुरे भारत में दो धर्म के संगम का जीता जगता उदाहरण है। ऐसा ही नाग मंदिर में भी होता है। जहाँ कभी भी बौद्ध मंदिर का पुजारी पूजा कर सकता है। यह स्थान संगम और श्रद्धा का एक प्रमुख केंद्र है। शायद यही कारण है की हिमाचल वासियो की जीवन सैली बहुत ही सरल है। यहां के अधिकतर लोग मिल झूल कर रहना पसंद करते है। यदि आप को भी अद्भुत और रोमांचित स्थान का दीदार करना है, तो आप को किन्नौर जिले में भर्मण करना होगा।

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इन मंदिरों के पीछे घरो के मध्य से एक नाला बहता है। बताया जाता है कि उसमे हर वर्ष बाड़ आ जाती थी। उसे रोकने के लिए देव-पुजारियों ने यह सलाह दी कि यहाँ बौद्ध मंदिर निर्मित किया जाए । जैसे ही बौद्ध मंदिर बना और उसकी प्रतिष्ठा हुई, उसके बाद उस नाले में कभी पानी नहीं भरा ।