धर्मशाला में स्तिथ तिब्बती कलाकृतियों और पांडुलिपियों तथा अभिलेखागार की “बौद्ध लाइब्रेरी” Buddhist library of Tibetan artifacts and manuscripts and archives at Dharamshala

picture_saved(33)

हिमाचल प्रदेश में बहुत से बौद्ध धर्म से संबंदित मठ और धार्मिक स्थान है। कुछ ऐसा ही एक लोकप्रिय और प्रसिद्ध स्थान है, काँगड़ा जिले के धर्मशाला में, यह एक बौद्ध लाइब्रेरी है। इस लाइब्रेरी में बहुत से ऐतिहासिक जो लगभग 12 वीं शताब्दी की तारीखों की कलाकृतियों और पांडुलिपियों स्तिथ है। यह लाइब्रेरी तिब्बती वर्क्स और अभिलेखागार की लाइब्रेरी बौद्ध धर्म के अध्ययन और अनुसंधान में एक प्रसिद्ध अग्रणी संस्था है।

picture_saved(34)

80,000 से अधिक पांडुलिपियों स्तिथ, More than 80,000 manuscripts

जिनमें सुंदर रूप से तैयार किये गए रेशम और एप्लिक थैग्कास और अवलोकितेश्वर के तीन आयामी, लकड़ी के नक्काशीदार मंडल शामिल किये गए है। जो बौद्ध धर्म के सबसे प्रतिष्ठित और दयालु बोधिसत्व में से एक हैं। यह स्थान बौद्ध धर्म के लोगो के लिए एक बहुत ही उपयोगी स्थान है। यह स्थान धर्मशाला गुमने आये सैलानियों के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र है। इस स्थान में 80,000 से अधिक पांडुलिपियों के साथ, 600 बौद्ध कलाकृतियां स्तिथ है।

picture_saved(35)

तेनजिन ग्यात्सो द्वारा हुई इस पुस्तकालय की स्थापना, This library was established by Tenzin Gyatso

पर्टयक इस संग्रहालय में शांति और शीतल हवा का आंनद ले सकते है। इस पुस्तकालय की स्थापना तेनजिन ग्यात्सो ने 11 जून 1970 को की थी। तेनजिन ग्यात्सो 14 वें दलाई लामा द्वारा की थी। इस बौद्ध लाइब्रेरी को दुनिया में तिब्बती कार्यों के सबसे महत्वपूर्ण पुस्तकालयों और संस्थानों में से एक माना जाता है।/ इस पुस्तकालय का उद्देश्य तिब्बत के लिए एक पूर्ण सांस्कृतिक संसाधन के रूप में काम करना है।

picture_saved(36)

बौद्ध पुस्तकालय के खुलने का समय और सांय जानकारी, Buddhist library opening hours and evening information

बौद्ध लाइब्रेरी के खुलने का समय सुबह 9 से शाम 5 बजे तक का है। यह लाइब्रेरी दोपहर 1 से 2 बजे भोजन के लिए बंद रहती है।इसके साथ ही यह लाइब्रेरी हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहती है। इस पुस्तकालय की तीसरी मंजिल में प्रसिद्ध और लोकप्रिय उल्लेखनीय कलाकृतियों के साथ एक संग्रहालय भी स्तिथ है। बौद्ध लाइब्रेरी की स्थापना का कारण अनुसंधान और ज्ञान के आदान-प्रदान की सुविधा के लिए पर्यावरण को बढ़ावा देना है।