किन्नौर जिले के नाको में स्तिथ बौद्ध मठ लोकप्रिय पर्टयक स्थान, Popular Buddhist monastery at Nako in Kinnaur district of Himachal

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हिमाचल प्रदेश का किन्नौर जिला बौद्ध धर्म और हिन्दू धर्म दोनों के धार्मिक स्थानों के लिए जाना जाता है। यहां बहुत से बौद्ध धर्म से संबंदित धार्मिक स्थान है। जहा बहुत से बौद्ध भिक्षु बौद्ध धर्म की शिक्षा लेते है, मठ बहुत ही ऐतिहासिक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लोकप्रिय इस मठ की स्थापना 11 वीं शताब्दी में एक प्रसिद्ध प्राचीन अनुवादक लोचन रिंचेन ज़ंगपो ने की थी। यह मैथ ऐतिहासिक होने के साथ साथ बहुत ही पूजनीय है। इस मठ की दुरी लगभग मनाली से जो एक विश्व प्रसिद्ध पर्टयक स्थान है, से लगभग 6 घंटे की दूरी पर यह नाको गांव में स्तिथ है।

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लोटसवा झकंग के नाम से विश्व विख्यात यह नाको का प्रसिद्ध मठ,The famous monastery of Nako, world famous by the name of Lotuswa Jhakung

यह मठ को लोटसवा झकंग के नाम से विश्व विख्यात है। नाको झील और नाको गांव बेहद शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यह मठ नाको झील के किनारे स्थित इस शांत मठ का निर्माण स्पीति घाटी में प्रसिद्ध ताबो मठ के पैटर्न पर किया गया है। इस मठ का द्वार, जटिल नक्काशियों से उत्कीर्ण है। जो बेहद आकर्षित है। वज्रयान बौद्ध धर्म से प्रेरित यह मठ, दूर-दूर के लोगों को आमंत्रित करता है। इस मठ की दीवारें सुंदर चित्रकारियों से सजी हुई हैं। नाको मठ में मिट्टी और धातु से बनी कई मूर्तियों के साथ-साथ स्तूपों और अनुवादित धर्मग्रंथों (कांग्युर) का संग्रह भी है।

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नाको के मठो में आने का सही समय। The perfect time to visit Nako’s monastery

इस मठ में सालो भर से दूर-दूर से पर्यटक गुमने के लिए आते हैं, यहां जून और जुलाई के महीने जब यह मठ अपना वार्षिक उत्सव मनाता है, उस वक्त सबसे अधिक पर्यटक यहां आते हैं। गर्मियों के समय यहां आना ठीक रहता है, इस दौरान यहां का मौसम काफी शांत होता है। इस मठ में त्योहार का मुख्य आकर्षण पारंपरिक चाम या मुखौटा नृत्य है, जो यहां के भिक्षुओं द्वारा किया जाता है। नाको अपनी कला और प्रसिद्ध मठो के लिए पुरे देश भर में जाना जाता है। यदि आप यहां गुमने के लिए आ रहे हो आप के लिए यहां बहुत से पर्टयक स्थान है। जो आप को बहुत ही रोमांचित करेंगे।