ऐतिहासिक “गौरीशंकर मंदिर” जहां होती है सभी की मुरादे पूरी, Historical “Gaurishankar Temple” in Himachal Pradesh where all wishes come true

हिमाचल प्रदेश में बहुत से धार्मिक स्थान जो बेहद प्रसिद्ध और लोकप्रिय है। हर साल भारी मात्रा में श्रदालु यहां दर्शन के लिए आते है। यह मंदिर सुजानपुर टीहरा में स्तिथ है, जो महाराजा संसार चंद के राज्य की राजधानी भी रही है, यही एक ऊँची पहाड़ी पर गौरीशंकर का प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर भी स्तिथ है। इस मंदिर की दीवारों में बहुत सी कलाकृतिया चित्रित है। इस मंदिर की समस्त दीवारें चित्रकारी से भरी पड़ी है। जो बेहद आकर्षित और लोकप्रिय है।

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इस मंदिर का निर्माण राजा संसार चंद ने 1804 ई0 में करवाया था। गौरीशंकर मंदिर में चित्रकला के अभूतपूर्व नमूने है। इन दीवारों में एक नवविवाहित जोड़े के चित्र को दर्शाया गया है। जिसमे भगवान शिव की प्रतिमा के साथ माँ पार्वती के दृश्य दिखाए गए है। इन दीवारों में स्वयं संसार चंद की तथा उनकी रानी प्रसन्ना देवी के भी चित्र प्रदर्शित किये गए है।

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राजा संसार चंद द्वारा करवाया गया इस मंदिर का निर्माण, This temple was built by King Sansar Chand

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह भी कहा जाता है, कि राजा संसार चंद ने इस किले को अपने निजी प्रयोग हेतु बनवाया था, यह मंदिर यहाँ के दुर्ग के परिसर के अंदर स्तिथ है। इस मंदिर के अंदर पहली बार पहाड़ी चित्रकला में पहाड़ों के सूंदर दृश्य को चित्रित किया गया है। जब यहां से बाहर जा कर जब मंदिर के पीछे का दृश्य देखे तो वही पहाड़ वहां भी दिखाई देते है।

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शिव और पार्वती की सुन्दर मुर्तिया है, विराजमान, Shiva and Parvati’s beautiful mortal, seated

यह मंदिर शिखर शैली में निर्मित है। जो उस समय एक लोकप्रिय और उत्तीर्ण कला प्रणाली थी। इस मंदिर के अंदर चांदी की शिव और पार्वती की सुन्दर मूर्ति विराजमान है। हर साल बहुत से श्रदालु यहां दर्शन के लिए आते है, इस मंदिर की यह मान्यता है की यहां जो भयउ भगत सच्चे मन से दर्शन के लिए आता है उस की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

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