ब्रांकोस्कोपी के द्वारा IGMC के चिकित्सकों ने रोगी के फेफड़े से पेन के ढक्कन को निकाला

हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान IGMC के चिकित्सकों ने 20 मिनट में रोगी के फेफड़े से पेन का ढक्कन निकाल दिया। ब्रांकोस्कोपी के द्वारा यह संभव हो पाया है। चंबा के विपिन उम्र 34 सीने में सीटियां बजने एवं संक्रमण के बाद अस्पताल गए थे।
डॉक्टरों ने जानकारी दी कि साल 2006 में मुंह के जरिये पेन के ढक्कन को रोगी ने गलती से निगल लिया था।

इस बीच रोगी को उल्टी भी हुई और उन्हें लगा कि उल्टी की दौरान ढक्कन निकल गया है। परन्तु उसके बाद रोगी को बार बार इंफेक्शन की समस्या होने लगी। बहुत जगह पर चिकित्सकों को भी दिखाया गया लेकिन रोगी की सभी टेस्ट रिपोर्ट सही पाई गईं। जबकि, मरीज को बुखार और सीने में सीटियां बजने की समस्या होती रही।

डॉक्टरों ने समझा कि रोगी को हो सकती है अस्थमा की बीमारी

डॉक्टरों ने इस बीच यह समझा कि रोगी को अस्थमा की बीमारी हो सकती है। इसके बाद रोगी 1 दिसंबर को IGMC गया। चिकित्सकों ने रोगी के सीने के X-ray एवं CT scan करवाए लेकिन फिर भी रिपोर्ट सामान्य ही आई।

चिकित्सकों ने Bronchoscopy test करने का लिया फैसला

बुधवार सुबह चिकित्सकों ने Bronchoscopy test करने का फैसला लिया। इस test में पता चला कि रोगी के फेफड़ों में पेन का ढक्कन फंसा हुआ है। लोकल Anaesthesia एवं Bronchoscopy test की सहायता से लगभग 20 मिनट के अंदर ही चिकित्सकों ने फेफड़े से पेन के ढक्कन को निकाल दिया।

फेफड़ों में फंस सकता है मूंगफली का दाना

रोगी को Pulmonary विभाग के वार्ड में Bed नंबर 12 में शिफ्ट किया गया है, जहां रोगी की हालत ठीक है। Pulmonary विभाग के प्रोफेसर आरएस नेगी, चिकित्सक डिंपल बगलानी, चिकित्सक अनुराग त्रिपाठी एवं डॉक्टर मनोज की टीम ने इस प्रक्रिया को पूरा किया।
फेफड़ों में फंस सकता है मूंगफली का दाना। चिकित्सकों के अनुसार छोटे बच्चों एवं बुजुर्गों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योकि मूंगफली का दाना खाने के बाद कई बार फेफड़ों में फंस जाता है। अभी तक 80 साल की आयु से अधिक बुजुर्गों का इस टेस्ट के द्वारा इलाज किया जा चुका है।

प्लास्टिक का ढक्कन था इसलिए X-ray एवं CT scan में नहीं दिख पाया : डॉक्टर आरएस नेगी

चिकित्सकों का कहना है कि अगर ये चीजें फेफड़ों में फंस जाए तो इससे सीने में संक्रमण की समस्या बढ़ जाती है। विभाग का मानना है कि मटर, सुई, मांस एवं सेब के टुकड़े फेफड़ों में फंसे होने के कारण उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया है। पल्मोनरी विभाग के चिकित्सक डॉक्टर आरएस नेगी ने कहा कि यह एक प्लास्टिक का ढक्कन था इसलिए X-ray एवं CT scan में नहीं दिख पाया। लेकिन अगर यह ज्यादा समय तक शरीर के अंदर रहता तो रोगी की हालत बिगड़ सकती थी।