कामरू किला हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्तिथ एक ऐतिहासिक स्थल, Kamru Fort, a historical place in Kinnaur

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किन्नौर जिले में स्तिथ सांगला गांव अब मुख्य पर्यटक स्थल बन चुका है। यह स्थान बहुत ही लोकप्रिय बन चूका है। सांगला गांव में बौद्ध धर्म के मानने वाले निवासी भारी मात्रा में पाई जाती है। सांगला गांव से महज 2 किलोमीटर दुरी पर यह ऐतिहासिक किला स्तिथ है। इसके किले के द्वार पर भगवान बुद्ध की बड़ी सी प्रतिमा है। यह किला ऐतिहासिक होने की बजह से अपने अंदर कई सदियों का इतिहास समेटे हुए है। यहां आये पर्टयक इस स्थान में अपने आप को किसी स्वर्ग में पाते है। सांगला घाटी का नजारा है ही कुछ ऐसा। जो सैलानियों को बहुत से अद्भुत नज़ारे प्राप्त करवाता है।

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1100 साल से भी पुराना है इस किले का इतिहास, The history of this fort is more than 1100 years old

आज भी यह ऐतिहासिक किला अपने में 1100 साल का इतिहास संजोये हुए है। इस किले में बुशहर रियासत के राजा प्रद्युम्न सिंह से लेकर राजा पदम सिंह तक जो भी राज सिंहासन पर विराजमान हुए। उन सभी का गवाह है यह किला। बना। तिब्बत और नेपाल हिमालय के मध्य में स्तिथ यह कामरू का किला आज भी इतिहासकारों और देश विदेश के सैलानियों के आकार्षण का केंद्र बना हुआ है। इस किले की खास बात यह है की इस किले में 121 राजाओं का राज तिलक हुआ है जो इस किले को ऐतिहासिक और रोमांचित बनाता है।

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इस ऐतिहासिक किले में 121वें राजा का हुआ था राजतिलक, The 121st king was crowned in this historic fort

इस कामरू किले में राजाओं की राजगद्दी आज भी यहां संजो कर रखी गई है। जिसे देखने के लिए हर साल बहुत से पर्टयक यहां गुने के लिए आते है। कामरू गांव नाम से जाने जाता है। यह गांव जो पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का पुश्तैनी गांव है। यह किला सात मंजिल का एक ऐतिहासिक किले में 121वें राजा राजतिलक हुआ था। पदम सिंह पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पिता थे। उनके पिता के बाद इस किले में किसी भी राजा का राज तिलक नहीं हुआ।

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सात गांव के लोगों ने मिलकर किया था इस किले का निर्माण, The people of seven villages had built this fort together

वीरभद्र सिंह का 122वें राजा के तौर पर जो राज तिलक तो हुआ था। मगर उन का राजतिलक कामरू की बजाय उनके दूसरे किले जिसे सराहन बुशहर नाम से जाना जाता है। इस किले में अभी भी राजा वीरभद्र सिंह अभी भी कामरू किले में आते है। यह ऐतिहासिक किला तीश खूनंग यानि सात गांव के लोगों ने मिलकर इस किले का निर्माण करवाया था। बुशहर रियासत की राजधानी कामरू में यह किला बनाने वाले सात गांव में रक्षम, बटसेरी, चासू छितकुल, सांगला, शोंग, और कामरू के नाम शामिल है।

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कामरू गांव का नाम और इस ऐतिहासिक किले का नाम कामख्या माता के नाम पर पड़ा, This fort was built by the people of seven villages

कामरू गांव जहा यह किला स्तिथ है इस किले का नाम यहां पर स्तिथ कामख्या माता के नाम पर पड़ा है। कई शताब्दियों पूर्व तत्कालीन राजा बुशहर गोवहाटी, असम से माता कामाख्या की मूर्ति लेकर आए थे। इस केले के भीतर स्थापित कर दिया। इस धार्मिक स्थान के कालान्तर में स्थानीय लोगों में माता के प्रति बढ़ती मान्यता और श्रद्धा के चलते मौने गांव का नाम ही बदलकर कामरू यानि कामाख्या माता के नाम पर रख दिया गया। तभी से लेकर मां कामाख्या और बुशहर रियासत की राजधानी कामरू को बनाया गया है।