“कामरुनाग झील” नाग देवता को समर्पित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थान, Kamarunag Lake is a famous religious place dedicated to Nag Devta

हिमाचल प्रदेश में स्तिथ यह बहुत ही लोकप्रिय और धार्मिक झील है जिसके साथ ही एक नाग मंदिर भी स्तिथ है। यह धार्मिक स्थान मंडी जिले में स्तिथ है। यह झील मंडी घाटी की तीसरी प्रमुख झील है। यहाँ पर कमरूनाग देवता का प्राचीन मंदिर भी स्तिथ है। इस धार्मिक स्थान में जून माह में विशाल मेले का आयोजन होता है। जहाँ देश विदेश से श्रदालु दर्शन के लिए आते है। इस झील तक पहुँचने का रास्ता भी बहुत सुरम्य है और यहाँ के लुभावने और रोमांचित दृश्यों को देखकर पर्यटक अपनी सारी थकान को भुला कर यहां के दृश्यों में मनमोहित हो जाते है।

kam02

महाभारतकाल से सम्बंदित है यह धार्मिक स्थान, This religious place belongs to Mahabharata period

यह स्थान धौलाधर रेंज और बलह घाटी का दृश्य उस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता बहुत ही अद्भुत दृश्य प्रदान करता है। जहां देव कामरुनाग की झील और पेंट छत मंदिर देवदार के मोटे जंगलों से घिरा हुआ है। परंपरा के अनुसार कामरुनाग महाभारत का राजा यक्ष है और इस स्थान में पांडवों ने पूजा की थी। यहां स्तिथ देव कामरुनाग द्वारा उनकी इच्छाओं की पूर्ति पर भक्तों द्वारा झील में सोने चांदी और सिक्के को झील में फैकने की परंपरा है। प्रकृति प्रेमियों के लिए कामरुनाग की यात्रा किसी स्वर्ग से काम नहीं है।

kam05

यहां के पूजनीय धार्मिक स्थान में स्तिथ देव कमरूनाग को बारिश का देवता कहा जाता है। इस देवता को लेकर यहां के लोगो की बहुत ही अटूट आस्था है। देव कमरूनाग का मूल मंदिर मंडी जिला के रोहांडा की ऊंची चोटी पर स्तिथ है। इस मंदिर में स्तिथ देव कमरूनाग के इतिहास की अगर बात करें तो इनका वर्णन महाभारत काल से भी वर्णन मिलता है। जिसमे राजा रत्न यक्ष के रूप में मिलता है। रत्न यक्ष भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। यह काफी शक्तिशाली और बलशाली थे और विष्णु के अनन्य भक्त थे।

भीम और घटोत्कच के पुत्र रत्न यक्ष का वर्णन, The description of Ratna Yaksha son of Bhima and Ghatotkacha

जब महाभारत का युद्ध हुआ तो इन्हें किसी ने भी युद्ध के लिए आमंत्रित नहीं किया। ऐसे में रत्न यक्ष ने निर्णय लिया कि वह स्वयं युद्ध में जाएंगे और जो हार रहा होगा उसका साथ देंगे। लेकिन यह युद्धक्षेत्र तक पहुंचते उससे पहले ही भगवान विष्णु ने गुरूदक्षिणा के रूप में उनका शीष मांग लिया।

kam04

रत्न यक्ष ने भगवान विष्णु से अपना शीश देकर युद्ध देखने की इच्छा जताई। परन्तु रत्न यक्ष इतने शक्तिशाली थे। जैसे ही इनके शीश को जब एक डंडे पर टांग दिया गया। उसके बाद भी इनका शीश भी इतना शक्तिशाली था कि वह जिस तरफ मुड़ता उस पक्ष का पलड़ा भारी हो जाता था। ऐसे में श्रीकृष्ण ने इनके शीश को एक पत्थर से बांधकर पांडवो की ओर कर दिया।

kam03

जिस से पांडवों की विजय हुई और उन्होंने ने भी रत्न यक्ष को पूजा और जीत मिलने पर राज्याभिषेक इन्हीं के हाथों से करवाने की बात कही। पांडवों की जीत हुई और फिर रत्न यक्ष को उन्होंने अपना गुरु माना और मंडी की एक पहाड़ी पर इनकी स्थापना की और इनको कमरूनाग नाम दिया गया।

अत्यंत प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह धार्मिक स्थल, This religious place full of natural beauty

जिला की कमरूनाग झील के अपार नैसर्गिक सौंदर्य को निहारने से पर्यटक सुविधाओं की बेशक कमी हो मगर श्रदालु पूरी श्रद्धा के यहां दर्शन के लिए आते है। कमरूनाग झील की खूबसूरती ने केवल प्रदेश व देश भर के पर्यटकों बल्कि ट्रैकरों को भी अपनी और आकर्षित करती है। इस की समुद्रतल से ऊंचाई 3334 मीटर की बजह से यहां तक पहुंचने के लिए अभी तक सडक मार्ग की सुविधा उपलब्ध नहीं है। परन्तु कमरूनाग मंदिर कमेटी की ओर से इस धार्मिक मंदिर की सीमा के भीतर के रास्तों को पक्का किया गया है। ताकि यहां आये लोगो को ज्यादा परेशानी का सामना ना करना पड़े। इसकी साथ ही यहां बहुत सी लाभदायक जडी-बूटियां मौजूद हैं।