“किब्बर गांव” लाहौल स्पीति में बसा भारत के सबसे ऊँचे गांवों में से एक, Kibber Village Lahaul Spiti in Hindi

हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में स्तिथ यह एक बहुत ही लोकप्रिय पर्टयक स्थान हैं। जो अपनी सुंदरता और वातावरण के लिए जाना जाता है। यह स्थान ऊँचे ऊँचे ऊँचे पर्वतो के बिच में स्तिथ है। इस गांव को हिमाचल प्रदेश में ही नहीं दुनिया का सबसे ऊँचा गांव माना जाता है। जो अपने अद्भुत दृश्य और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। इस लोकप्रिय गांव की ऊंचाई समुद्रतल से 4850 मीटर है।पहाड़ो के बिच में बसा यह गांव हिमाचल प्रदेश के स्पीति घाटी में स्तिथ है। किब्बर गांव में कई बौद्ध मठ हैं। जो बौद्ध धर्म से समबन्दित है। किब्बर में बनी मॉनेस्ट्री सबसे ऊंचाई पर बनी है।

दुनिया का सबसे उँचा गांव जहां है लोगो का निवास, The highest village in the world where people live

हिमाचल प्रदेश में स्तिथ यह किब्बर गाँव बहुत सारी चीज़ों की वजह से बाकी जगहो से अलग है। यह सबसे उँचाई में बसा गाँव होने के साथ-साथ दुनिया का सबसे उँचा ऐसा क्षेत्र है जहाँ वाहनों की आराम से आवाजाही होती है। हर साल बहुत से पर्टयक यहां गुमने के लिये आते है। यहां के निवासी बहुत से त्योहाहरो का आयोजन करते है। और ज्यादा तर अपना समय परिवार के सदस्यों के साथ बिताते है।यहां के लोग का खेती करना मुख्य पेशा है। जिससे की यहाँ के हेर भरे खेतों को देख कर आपका मन खुशी से झूम उठेगा। किबर में और भी बहुत से पर्टयक स्थान है जो बहुत ही लोकप्रिय और सौंदर्य से भरपूर है।

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शांत और सरल जीवन, Quiet and simple life

यहाँ के निवासी बहुत शांत होते है। और एक सरल जीवन व्यतीत करते है। ऐसे निर्मल क्षेत्र में वहाँ के लोगों के सामुदायिक जीवन को देखना बड़ा ही आनंदपूर्ण होता है। यहाँ गाँव वाले या तो खेतों में कार्य करते हैं या फिर काज़ा जाकर कोई कार्य करते हैं। काजा एक छोटा मगर सौंदर्य से भरपूर एक बहुत ही सूंदर गांव है जो पहाड़ी के ऊपर स्तिथ है। लाहौल का यह गांव कियबर के नाम से भी जाना जाता है। यह गांव स्थानीय मठ और किब्बर वन्यजीव अभयारण्य पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। इस गाँव की उंचाई और प्रदूषण से बचाती है। यहां का वातावरण भी बहुत हि अच्छा और सुखद है। जो स्काई गेजर्स और फोटोग्राफरों के लिए एक आदर्श स्थान माना जाता है।

बर्फीले रेगिस्तान में स्तिथ यह अद्भुत और मनमोहित स्थल, This amazing and adorable place in the snowy desert

सबसे दिलचस्प होता है, यहाँ पर बने घरों को देखना जो पहाड़ों की उँचाई पर बड़ी ही खूबसूरती से बसे हुए हैं। यहाँ पर एक बौद्ध मठ भी है जो गाँव के सबसे शीर्ष बिंदु पर स्थित है। हालाँकि किब्बर का यह मठ उतना बड़ा नहीं है, पर स्थान जहाँ यह बसा है, वह स्थान पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। किब्बर गाँव में अगर आप कुछ दिनों के लिए रहना चाहते हैं, तो वहाँ कुछ लौज और गेस्ट हाउस के प्रबंध हैं। हालाँकि, क्ये मठ जो रास्ते में ही पड़ता है, और किब्बर गाँव की पूरी यात्रा आप काज़ा से सिर्फ़ एक दिन में ही पूरी कर सकते हैं।

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किब्बर घाटी में कहीं सपाट बर्फीला रेगिस्तान है तो कहीं हिम शिखरों में चमचमाती झीलें। यहां आकर सैलानी यहां की प्राकृतिक छटा, अनूठी संस्कृति, निराली परंपराओं और बौद्ध मठों के बीच खुद को एक नई दुनिया में पाते हैं। एक बार अगर आप किब्बर की ट्रिप करेंगे तो जिंदगीभर यहां की ताजगी नहीं भूल सकेंगे। काजा के किब्बर को जाने वाले इस रास्ते में कई बौद्ध मठ भी पड़ते हैं।

दुनिया से अलग थलग यह विचित्र गांव, This quaint village isolated from the world

किब्बर की घाटियों में खेतों में झूमती फसलें मन मोह लेती हैं। कभी बादलों के टुकड़े यहां के खेतों और घरों में समाये हुए व्यतीत होते है। इस गांव की अनूठी संस्कृति, निराली परंपराओं और बौद्ध मठों के बीच यहां आये पर्टयक खुद को एक नई दुनिया में पाते हैं। उच्च हिमालय में होने की बजह से यहां बर्फ इतनी गिरती है कि कई-कई फुट मोटी बर्फ की परते जम जाती हैं। बर्फबारी होने पर किब्बर दुनिया से कट सा जाता है। यहां जाने का रास्ता बेहद खूबसूरत और रोमांचित है।

किब्बर गांव में 100 से अधिक एक जैसे देखने वाले घरो का दृश्य, View of over 100 identical viewing houses in Kibber village,

यहां का लोकनृत्य अनूठा है। यहां की महिलाएं और पुरुष दोनों ही चुस्त पायजामा पहनते हैं। यहां के लोग एक खास जूता पहनते हैं जिसे ल्हम कहा जाता है। इस जूते का तला चमड़े का होता है, जबकि ऊपरी भाग गर्म कपड़े का बना होता है। किब्बर गांव में 100 से अधिक घर हैं। खास बात यह है कि सभी घर पत्थर और ईंट के बने हुए हैं। घरों की एकरूपता इन्हें दूर से देखने पर और आकर्षक बनाती है। सभी घर सफेद रंग के हैं। यहां पाए जाने वाले जानवरों में ब्लू शीप, आईबेक्स, रेड फॉक्स, हिमालयी भेड़िया और स्नो लेपर्ड हैं।

प्रकृति और सौंदर्य से भरपूर गांव, Nature and beauty-rich village

यदि आप किब्बर गांव में रात में रुकते है तो आप को यहां बिताये रात्रि का अलग ही अनुभव महसूस होता है। यहां रात में तारे इतने नजदीक दिखते हैं कि लगता है कि आप इन टिमटिमाते तारों को हाथ से छू सकते हैं। यहां रात्रि निवास के लिए गेस्ट हाउस भी स्थापित हैं। जहा रुक कर आप यहां की सुंदरता और अद्भुत दृश्य को देख सकते है। यहां खड़े होकर आप दूर-दूर तक बिखरी मटियाली चट्टानों और रेतीले टीलों पर बनी प्राकृतिक कलाकृतियां आपको मनमोहित कर देगी और आप यहां आ कर झूमने पर मजबूर हो जायँगे। इन आकृतियों को देखकर यह व्यतीत होता है की प्रकृति ने इस स्थान को फुरसत में बनाया होगा।

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बौद्ध धर्म का धार्मिक स्थान, Religious place of Buddhism

किब्बर गांव बौद्धों के लिए बेहद खास स्थान है क्योंकि यहाँ पर दलाई लामा, सेरकोंग रिनपोछे के शिक्षक की मृत्यु हुई थी। जिस कारण यहां बहुत से बोधि धर्म के बहुत से मठ और धार्मिक स्थान है। किब्बर गाँव के स्थानीय मठ का बौद्ध धर्म लिए बहुत बड़ा महत्व रखता है। लाहौल स्पीति के इस खूबसूरत किब्बर गांव घूमने के लिए सबसे अच्छा समय गर्मियों के मौसम में होता है। यहां बहुत से मठ स्तिथ है जहा बहुत से भिक्षु बोध धर्म की शिक्षा और अपना जीवन शांति और सरलता से व्यतित करते है।

किब्बर गांव आने का सही समय और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी, Right time to visit Kibber village and other important information

इस स्थान में आने के लिए जुलाई से अक्टूबर तक समय बेहतर होता है। इस समय यहाँ का ठंडा मौसम सहन करने योग्य होता है। इस गांव का तापमान सर्दियों में -20 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। यहाँ पर पड़ी बर्फ गाँव की सुंदरता को बढाती है। सदियों के मौसम में यहाँ आने के लिए मार्ग अधिक बर्फबारी के दौरान बंद हो जाता है। लाहौल स्पीति की सीमा पर स्तिथ रोहतांग दर्रा भी बर्फ के कारण बंद हो जाता है। यह दर्रा गर्मियों के दौरान ही खुलता है।

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काजा से किब्बर दुरी और पहुंचने के साधन

मानसून के दौरान किब्बर की यात्रा करना बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि इस दौरान भूस्खलन का खतरा अधिक होता है। यहां आने के लिए आप काजा से किब्बर के लिए लोकल हिमाचल प्रदेश परिवहन बस की सेवा का प्रयोग कर सकते है। काजा से किब्बर आने के लिए आप टैक्सी का प्रयोग भी कर सकते है। काजा से यह खूबसूरत गांव केवल 20 किलोमीटर की दुरी पर स्तिथ है। भारत की राजधानी दिल्ली से यह स्थान 732 किलोमीटर की दुरी पर स्तिथ है। आप भी यदि कभी हिमाचल प्रदेश के लिए आते है तो इस स्थान में आना ना भूले। और प्रकृति के सौंदर्य का आंनद ले।