“देवी चण्डिका” का प्रसिद्ध और लोकप्रिय धार्मिक मंदिर, The famous and popular religious shrine of “Devi Chandika” Kinnaur

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देवी चण्डिका हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्तिथ कल्पा और रिकांग पीओ के बिच में स्तिथ एक बहुत ही प्रसिद्ध धार्मिक स्थान है। यह धार्मिक स्थान रिकांग पीओ बस स्टैंड से लगभग 3 किलोमीटर की दुरी पर माँ चंडिका को समर्पित माता का मंदिर है। इसके साथ ही यह मंदिर कोठी माता को भी समर्पित है, कोठी माता किन्नौर जिले की सबसे शक्तिशाली देवी के रूप में जानी जाती है। इस मंदिर में पूजा और आस्था का कुछ अलग ही रूप देखने को मिलता है।

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दानव देवता बाणासुर की सबसे बड़ी बेटी “देवी चण्डिका” Elderly daughter of demon deity Banasura “Goddess Chandika”

यहां मंदिर में, माता की स्वर्ण मूर्ति को चार भक्तों द्वारा एक पालकी उठाया जाता है, और जिसे लगातार हिलाया जाता है, जिसे माँ देवी चण्डिका का नृत्य भी कहा जाता है। इस मंदिर का निर्माण समृद्ध लकड़ी की वास्तुकला और चांदी के दरवाजे के साथ हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह माना जाता है कि देवी चंडिका दानव देवता बाणासुर की सबसे बड़ी बेटी थीं, जिन्होंने किन्नौर राज्य पर शासन किया था। हर साल बहुत से पर्टयक यहां गुमने और समय व्यतीत करने के लिए आते है।

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किन्नौर की सबसे शक्तिशाली और धनी देवी, Most powerful and wealthy goddess of Kinnaur

किन्नौर का यह प्रसिद्ध चण्डिका देवी कोठी कल्पा गांव और रिकांग-पिओ के मध्य बसा हुआ है। इस मंदिर का मुख्य आकर्षण केंद्र देवी का विशाल रथ माना जाता है। यह रथ मंदिर परिसर के अंदर रखा होता है। इस रथ पर माता की सोने की प्रतिमाएं सुसज्जित रहती हैं। इस मंदिर में विराजमान चण्डिका देवी का दूसरा नाम शुवांग चण्डिका भी है। देवी चण्डिका किन्नौर की शक्तिशाली और धनी देवी है।

पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, According to mythological and historical beliefs

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवी चण्डिका बाणासुर के अट्ठारह पुत्र-पुत्रियों में से एक है। बाणासुर ने हिरमा राक्षसी से विवाह किया था। जिनसे ये पुत्र-पुत्रियों उत्पन हुए थे। कुछ समय बाद में इन पुत्र-पुत्रियों ने किन्नर प्रदेश को आपस में बांट लिया था। देवी चण्डिका ने अपने पराक्रम और प्रतिष्ठा से इस क्षेत्र में अपना प्रभाव जमा लिया था। यह कोठी गांव किन्नौर का सबसे प्राचीन गांव है। यहां के स्थानीय लोग इसे कोष्ठम्पी के नाम से भी जानते हैं।

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यह मंदिर किन्नौर गुमने आये सैलानियों को बेहद आकर्षित करता है। देश विदेश से सैलानी इस मंदिर में दर्शन के लिए आते है। इस मंदिर की वास्तुकला और कलाकृति बहुत ही अद्भुत और आकर्षित है। यदि आप भी कभी किन्नौर की यात्रा के लिए आओ तो इस स्थान में आना ना भूले।