शिकारी देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश में स्तिथ एक रहस्मयी स्थान जहाँ ना ही तो कोई छत है ना ही कोई दीवार, Shikari Devi Temple is a mysterious place in Himachal Pradesh where there is no roof nor any wall

यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर में स्तिथ हिन्दुओ का धार्मिक स्थान है। देवभूमि नाम से विख्यात हिमाचल प्रदेश में बहुत से ऐसे स्थान है। जो कई रहस्यों से भरे पड़े है। इन मंदिरों से जुड़ी बहुत सी रोचक बातें हर किसी को हैरान और भ्यावित कर देती हैं। फिर चाहे वो ज्वाला जी मंदिर हो या बिजली महादेव ऐसे बहुत से धार्मिक स्थान है। जिनके रहस्य को अभी तक ना ही विज्ञान समज पाया है ना ही अनुभवी लोग। कुछ ऐसा ही एक धार्मिक स्थान है।

बर्फ भी नहीं टिक पाती माता की पिंडियो में Not even snow can survive in the bodies of Mata

मंडी जिले में जो शिकारी देवी का मंदिर नाम से जाना जाता है। जिला मंडी के गोहर उपमंडल के जंजैहली के समीप ऊंचे पहाड़ों पर स्थित यह मंदिर बहुत सी रहस्मयी बातो से भरा हुआ है। जो भी श्रदालु सच्चे मन से यहां दर्शन के लिए यहां आता है उस की हर एक मुराद पूरी होती है।
यह स्थान इतना धार्मिक है की यहां किसी भी प्रकार की कोई छत नहीं टिक पाती और ना ही ही इस मंदिर के ऊपर से कभी कोई पक्षी उड़ता है। यहां तक की सर्दियों में यहां भारी मात्रा में बर्फबारी होती है। परन्तु माता की पिंडियो में बर्फ ही नहीं टिक पाती यह स्थान बहुत पवित्र और चमत्कारी है।

shikari04

मंडी का क्राउन नाम से विख्यात यह स्थान, This place is famous as Crown of Mandi

यह धार्मिक स्थान शिकारी देवी मंदिर जंजैहली से लगभग 18 किलोमीटर की दुरी पर स्तिथ है। यह स्थान मंडी जिले का सर्वोच्च शिखर है जिस बजह से इसे मंडी का क्राउन भी कहा जाता है। विशाल हरे चरागाह, मनोरंजक सूर्योदय और सूर्यास्त बर्फ से ढके ऊँचे पहाड़ो का मनोरम दृश्य इस जगह को प्रकृति प्रेमियों के लिए पसंदीदा बनाते हैं। सर्दियों के दौरान इस जगह बहुत बर्फ होती है। इस रोमांचित स्थान में पैदल पथ से करसोग से संपर्क किया जा सकता है जो शिकारी देवी से सिर्फ 21 किमी की दुरी में स्तिथ है।

shikari03

पौराणिक कथा के अनुसार, according to legend

इस लोकप्रिय मंदिर की स्थापना को लेकर पौराणिक कथा के अनुसार यह मानना है की यहां पांडवो और कौरवो के बीच में जुए का खेल आयोजित हुआ था। इसी स्थान में एक औरत ने उनको मना किया उसको खेलने से होने वाले हानि से बचा नहीं जा सकता। परन्तु पांडवो ने फिर भी जुआ खेला और उस के फलस्वरूप पांडवो को अपना महल और राजपाट छोडकर निर्वासित होना पडा। इसी दौरान जब पांडव अपना वनवास काट रहे तो वो इस क्षेत्र में पहुंचे और उन्होंने इस स्थान में समय व्यतीत किया। कुछ समय यहां पर रहने के बाद एक दिन अर्जुन एवं अन्य भाईयो ने एक सुंदर मृग देखा तो और उसका शिकार करना चाहा मगर मृग काफी पीछा करने के बाद भी उनकी पकड़ में नहीं आया।

shikari05

नवदुर्गा की अवतार, Avatar of Navadurga

सभी पांडव भयवित हो गए की कहि वो मृग मायावी तो नही था। तभी आकाशवाणी हुई कि मै इस पर्वत पर वास करने वाली शक्ति हूं और मैने पहले भी तुम्हे जुआ खेलते समय सावधान किया था पर तुम नही माने और इसीलिये आज वनवास भोग रहे हो। यह वही औरत थी जिसने उन्हें जुआ खेलने से मना किया था। इस पर पांडवो ने उनसे क्षमा प्रार्थना की तो देवी ने उन्हे बताया कि मै इसी पर्वत पर नवदुर्गा के रूप में विराजमान हूं और यदि तुम मेरी प्रतिमा को निकालकर उसकी स्थापना करोगे तो आप सब को अपना राज्य पुनः प्राप्त हो जाएगा।

shikari02

माता तथा मंदिर का नामकरण कैसे हुआ, How was the mother and temple named

पांडवो ने बिना ज्यादा विचार विमर्श किये बिना ऐसा ही किया और उन्हे नवदुर्गा की प्र​तिमा मिली जिसे पांडवो ने पूरे विधि विधान से स्थापित कर दिया। इसी दौरान ही माता का और इस मंदिर का नाम शिकारी देवी पड़ा। क्युकी माता मायावी मृग के शिकार के रूप में मिली थी इसलिये माता का नाम शिकारी देवी कहा गया। इस मंदिर ने हर साल बहुत से श्रदालु दर्शन के लिए आते है। यदि आप भी कभी मंडी की यात्रा के लिए जाओ तो इस स्थान में जाना ना भूले।