हिमाचल प्रदेश में स्तिथ भारत का दूसरा सबसे ऊँचा भाखड़ा नांगल बांध, India’s second highest Bhakra Nangal dam in Himachal Pradesh

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यह बाँध हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्तिथ है, जो सतलुज नदी पर बनाया गया है। इस बाँध की ऊंचाई लगभग 740 फीट है जो ऊंचे टिहरी बांध के बाद भारत का दूसरा सबसे ऊंचा बांध माजा जाता है। ये परियोजना पंजाब में सतलुज नदी पर स्थित भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना मानी जाती है। इस परियोजन से राजस्थान, पंजाब और हरियाणा को जोड़ा गया है। इस अद्भुत भाखड़ा नांगल बांध का निर्माण 1948 में शुरू किया गया था और इसे 1963 में पूरा हुआ। इस बाँध के निर्माण में लगभग 15 साल ;गई थे। सन 1970 में इसे कार्य में लाया गया उस समय तक यह पूरी तरह से कार्य करने लगा था।

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यदि भाखड़ा नांगल बांध टूट जाए तो क्या होगा ? What will happen if the Bhakra Nangal Dam breaks?

भाखड़ा नांगल बांध के निर्माण का मुख्य कारण सिंचाई एवं विद्युत उत्पादन था। यदि इतना बड़ा बाँध और इतनी ऊंचाई पर होने की बजह से यदि यह भाखड़ा डैम टूट जाए तो क्या होगा। इस बांध से 1325 मेगावॉट बिजली का उत्पादन किया जाता है। इसके टूटने से पहले तो बिजली का संकट खड़ा हो जाएगा। इसके साथ ही पंजाब और हरियाणा के बहुत से हिसे पानी में बह जाएंगे। यदि पानी का बहाव अधिक हुआ तो। जान मान का भी बहुत नुक्सान होगा। बहुत से लोग बेघर हो जानेंगे।

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पूर्व प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा किया गया था उद्घाटन, Inauguration was done by former Prime Minister Pandit Jawaharlal Nehru

भारत का यह प्रसिद्ध बाँध भाखड़ा नांगल परियोजना का उद्घाटन पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा किया गया था। तथा उन्होंने कहा था की यह बाँध भारत का नवीन मन्दिर है और यह भारत की प्रगति का प्रतीक है। शिवालिक की पहाड़ियों के बीच बने इस भाखड़ा बाँध की लम्बाई 1700 फीट है। इस बाँध के आधार में इसकी चौड़ाई 625 और ऊपर 30 फीट है। वहीं इससे 13 किलोमीटर दूर नीचे स्थित नांगल बाँध 95 फीट ऊँचा और 1000 फीट लंबा है।

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250 से अधिक छोटे बड़े गांव को होती है, बिजली प्राप्त, More than 250 small villages get electricity

इस परियोजना के जरिये सीकर, झुंझनू श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, और चुरू ज़िलों के अलावा 250 से अधिक छोटे बड़े गांव को बिजली प्राप्त की जाती है। भाखड़ा नांगल परियोजना तथा इस बांध को पर्यटन की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण समझा जाता है। इस बांध को बनवाने का सर्वप्रथम विचार ब्रिटिश सर लुईस डेन, लेफ्रटीनेंट गोवर्नर पंजाब को आया था। इस सन्दर्भ में उन्होंने सुन्नी से बिलासपुर और बिलासपुर से रोपड़ तक निरिक्षण किया था।