तांत्रिक अनुष्ठान कला और बौद्ध दर्शन के अध्ययन के लिए प्रसिद्ध ग्युतो मठ धर्मशाला, Famous Gyuto Math Dharamshala for the study of Tantric ritual art and Buddhist philosophy

हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले में स्तिथ यह मठ धर्मशाला की निकट सिद्धबाड़ी में स्तिथ एक बौद्ध मठ है जो अपनी तांत्रिक अनुष्ठान कला और बौद्ध दर्शन के अध्ययन के लिए पुरे देश भर में जाना जाता है। इस मठ जैसे मठ की स्थापना तिब्बत में 1474 में प्रथम दलाई लामा के मुख्य शिष्य जेट्सन कुंगा धोंडुप ने की थी। उसके बाद जब 1959 में तिब्बत पर कम्युनिस्ट चीनी आक्रमण हुआ उस के बाद के बाद भारत में यह मठ फिर से स्थापित हुआ। यह काग्यू तिब्बती बौद्ध धर्म के प्रमुख करमापा जी का निवास स्थान है।

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हर वक्त रहते है लगभग 200 भिक्षु, Around 200 monks live all the time

करमापा शव्द का अर्थ है जो बुद्ध की सभी गतिविधियों को मूर्त रूप देता है। इस प्रसिद्ध मठ के मुख्य कक्ष में बुद्ध की एक राजसी प्रतिमा स्तापित है। यहां से बर्फ से ढकी धौलाधार के पर्वत इसकी पृष्ठभूमि में नजर आती है। जो एक बहुत ही अद्भुत दृश्य प्रदान करती है। इस लोकप्रिय मठ में हर वक्त लगभग 200 भिक्षु रहते हैं। जो गुह्यसमाज, चक्रसमार और यमंतक सहित प्रमुख तांत्रिक ग्रंथों का अभ्यास करते हैं। इसके अलावा टी सी वी स्कूल के रूप में भी प्रसिद्द इस मठ में साख्यमुनि बुद्ध, जिन्हें गौतम बुद्ध के रूप में भी जाना जाता है। की एक मूर्ति है जो एक छोटे से कक्ष में रखी गई है।

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गुमने आये सैलानी भी ले सकते प्रार्थना में भाग,, Missing tourists can also participate in prayer

यहां गुमने आये पर्यटक बुधवार और शनिवार को इस पवित्र स्थान में प्रार्थना में भाग ले सकते हैं। धर्मशाला में मुख्य बस अड्डे से मठ तक बसें उपलब्ध रहती हैं। आप धर्मशाला से टैक्सी के द्वारा भी यहां पहुंच सकते है। धर्मशाला से इस मठ की दुरी 8 किमी और मैक्लोडगंज से इस मठ की 13 किमी की दूरी है। ग्यूतो मठ पालमपुर के मुख्य मार्ग पर सिद्धबाड़ी में स्थित है। हर साल बहुत से सैलानी यहां गुमने और समय व्यतीत करने के लिए आते है।

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सम्राट अशोक द्वारा निर्माणित एक ऐतिहासिक स्तूप, A historical stupa built by Emperor Ashoka

इस मठ की स्थापना का एक कारण और भी था यह मठ उन तिब्बती सैनिकों की स्मृति की याद में बनाया गया था। जिन्होंने तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए अपनी जान गँवा दी। यहाँ एक स्तूप जैसी संरचना भी है जो उन संरचनाओं की तरह है। जिनका निर्माण सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी के दौरान किया था। धर्मशाला गुमने आये सैलानियों का यह पसदीदा स्थान है। यहां आ के पर्टयकों को बेहद शांति और सकून मिलता है। आप भी यदि धर्मशाला गुमने आओ टॉप इस स्थान में जान ना भूले।