त्रिलोकीनाथ मंदिर “लाहौल और स्पीति” में हिंदुओं और बौद्धों का एक विचित्र धार्मिक स्थान, Trilokinath Temple in Hindi

हिमाचल प्रदेश को देवी देवताओ की जन्म भूमि कहा जाता है। यहां के निवासी श्रद्धा में अधिक विश्वास करते है। हिमाचल प्रदेश में बहुत से धार्मिक तीर्थस्थल है। जहां देश विदेश से लोग दर्शन के लिये आते है। आज हम आप को एक ऐसे विचित्र धार्मिक स्थान के बारे में बताएंगे जहा दो धर्मो के लोग एक साथ पूजा करते है। इस मंदिर में महात्मा बुद्ध विराजित हैं। और हिन्दू मान्यताओं के अनुसार हिंदू संप्रदाय के अनुयायी त्रिलोकीनाथ जी को शिव और बौद्ध संप्रदाय के अनुयायी अवलोकितेश्वर के नाम से पुकारते और उन की पूजा करते है। हिंदुओं के इस भक्ति केंद्र को शैव पीठ भी कहा जाता है।

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त्रिलोकीनाथ मंदिर का निर्माण पथरो से हुआ है। जिसका दृश्य बहुत ही खूबसूरत है। यह मंदिर शिखर शैली का बना हुआ है। इस मंदिर में छह भुजाओं वाले भगवान त्रिलोकीनाथ जी एक मूर्ति के रूप में विराजमान है। सिर पर बौद्ध की आकृति है। हिंदुओं और बौद्धों के लिए यह स्थान बहुत ही पवित्र और आध्यात्मिक स्थल है। यह मंदिर उदयपुर गाँव से लगभग 9 किमी दूर स्थित है।

पाप और पुण्य का फैसला करता यह धार्मिक मंदिर, This religious temple decides sin and virtue

त्रिलोकीनाथ मंदिर की एक ख़ास बात यह है की इस मंदिर परिसर के अंदरूनी मुख द्वार के दोनों किनारो में दो स्तम्भ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह स्तम्भ मनुष्य के पाप और पुण्य का फैसला करते है। कहा जाता है की जो कोई व्यक्ति भी अपने पाप और पुण्य का पता लगाना चाहता है तो इन स्तम्भो से उसे निकलना होगा। मान्यता है की अगर व्यक्ति चाहे कितना भी मोटा या भारी भरकम शरीर वाला क्यों ना हो उसने यदि पुण्य किये हो तो आसानी से इन स्तम्भों से निकल जाता है।

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और यदि कोई इंसान पापी हो और कितना भी पतला क्यों ना हो यहां से नहीं निकल पाता। इसी बजह से यहां हर साल बहुत से श्रदालु दर्शन और अपने पाप पुण्य का फैसला करने के लिए इस धार्मिक स्थान में दर्शन के लिये आते है। हिमाचल प्रदेश में स्तिथ यह मंदिर लाहौल स्पीति से 37 किलोमीटर जी दुरी पर स्तिथ है। त्रिलोकीनाथ मंदिर 2760 मीटर की ऊंचाई पर त्रिलोकीनाथ गांव में सड़क के अंत में सफ़ेद रंग का सुंदर स्थान है। यह धार्मिक मंदिर कैलाश और मानसरोवर के बाद सबसे पवित्र तीर्थ माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण पत्थर के शिलालेख के अनुसार त्रिलोकीनाथ मंदिर मूल रूप से 10 वीं शताब्दी में बनाया गया था।

ऐतिहासिक और पौराणिक जानकारी के अनुसार, According to historical and mythological information

इस स्थान का नाम पहले तुंदा गांव था। पौराणिक मान्यता की कई वर्षों पूर्व इस गांव के समीप ही एक हिन्सा गांव था। जहां टिंडणू नाम का गड़रिया रहता था। जो गांव के निवासियों की भेड़-बकरियां चराता था। जब निवासी शाम को अपनी बकरियों से दूध निकलते बकरी दूध ही नहीं देती। कहा जाता था की बकरियों का दूध कोई अनजान व्यक्ति निकाल ले जाता था। जिसका न तो गांव वालों और न ही गड़रिए को कुछ पता चलता था।

 

जब चोर का कोई पता नहीं चला तो गांव वालो ने गड़रियो टिंडणू पर झूठा आरोप लगा दिया कि दूध वो ही चुराता है। और गड़रियो को गांव से निकाल दिया गया। उस को इस बात का बहुत बुरा लगा और उस ने यह दृढ़ नीचये किया की वो चोर को ढूंढ के ही रहेगा और अपने आप को निर्दोषित सावित करेगा। उस ने रोज़ ही गांव में चुप चुप के निगरानी रखने लगा एक दिन उसने पाया की की एक जलाशय से एक जलाशय से सात मानस आकृतियां निकलीं और उन्होंने बकरियों को दुहना आरंभ कर दिया।

गड़रिया बेहद हैरान हुआ की यह क्या हो रा है। यह आकृतिया बहुत ही विचित्र था। टिंडणू ने भागकर उन्हें पकड़ने की कोशिश की परन्तु वो आकृतिया अदृश्य हो गयी। परन्तु गड़रिये ने एक आकृति को पकड़ लिया। यह सफेद रंग की कपडे में एक व्यक्ति था।

तुंदा गांव त्रिलोकीनाथ का विचित्र रहस्य, Bizarre mystery of Tunda village Trilokinath

व्यक्ति ने स्वयं को छुड़वाने के बहुत से प्रयास किये परन्तु उस के सभी प्रयास असफल रहा। फिर उसने टिंडणू से प्रार्थना की उसे छोड़ दिया जाए। टिंडणू को अपने पर लगे झूठे आरोप को हटाना था वह उसे गांव हिन्सा तक ले गया। वहां जाकर उसने गांव वालों को एकत्र कर चोर के विषय में बताया। गांव वालों ने इस सफेद कपड़ों वाले व्यक्ति को देखा तो उन्हें उस में देव स्वरूप दिखाई दिया। उन्होंने घी और दूध से उस व्यक्ति का पूजन आरंभ कर दिया।

इस व्यक्ति ने गांव वालों को इस बात कीजानकारी दी की वो त्रिलोकनाथ है। और इस गांव में पर निवास करना चाहता है। व्यक्ति ने कहा की उसे उन का यह तुंदा गांव भा गया है। फिर उन्होंने टिंडणू से कहा कि वह उस स्थान पर भी पूजन करके आए जहां से वह उन्हें लेकर आया है। साथ ही कहा जब वापिस आए तो पीछे मुड़कर न देखे।

टिंडणू जब उस स्थान में बापिस गया तो उस ने रास्ते में पीछे मूढ़ के दीक लिया और उसे स्थान में वो और व्यक्ति एक मूर्ति में परिवर्तित हो गए। तभी सभी गांव वाले एकत्रित हो गए। उसी दिन से इस स्थान का नाम तुंदा गांव से त्रिलोकीनाथ पड़ा। और यहां पर यह भव्य धार्मिक मंदिर बना।

त्रिलोकीनाथ मंदिर के खुलने और आने का सही समय, The right time to open and visit Trilokinath Temple

यह धार्मिक स्थान सुबह प्रातः 6:00 बजे खुल जाता है। और रात्रि 8:00 तक खुला रहता है। आप इस बिच कभी भी दर्शन के लिए आ सकते है हिमाचल प्रदेश में स्तिथ सबसे लोकप्रिय और धार्मिक स्थानों में से एक है। इस स्थान में आने के लिए सही समय गर्मियों में होता है। उच्च हिमालय में होने की बजह से यहां का वातावरण बहुत ठंडा होता है।

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सर्दियों में यहां आने के लिए सभी रास्ते बन्द होते है। आप भी यदि हिमाचल प्रदेश गुमने आने का प्लान बना रहे है। जून जुलाई से लेकर सितम्बर अक्टूबर तक सही रहता है। तो इस धार्मिक और पवित्र स्थान में आना ना भूले यह स्थान आप की आत्मा को बेहद शांति प्रदान करेंगा। लाहौल स्पीति में स्तिथ यह स्थान अपने ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के लिए पुरे देश विदेश में जाना जाता है।