कैंसर रोग का इलाज करने वाले मशहूर डॉक्टर येशी ढोंडेन हुए पंचतत्व में लुप्त

buddhist monk and physician yeshi dhonden

दुनिया भर में प्रख्यात दलाईलामा के निजी चिकित्सक रह चुके तिब्बतियन डॉक्टर पद्‍म श्री डॉक्टर येशी ढोंडेन तिब्बतियन पद्धति से कैंसर रोग का इलाज करने वाले शुक्रवार सुबह पंचतत्व में लुप्त हो गए। डॉक्टर येशी ने मंगलवार 26 November 2019 सुबह मैकलोडगंज में अपने निवासस्थान पर आखिरी सांस ली थी। डॉक्टर येशी ढोंडेन के पार्थिव शरीर की तिब्बती परंपरा के अनुसार तीन दिन तक पूजा की गई। डॉक्टर येशी के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई सुबह 6 बजे मैकलोडगंज चर्च के पास श्मशानघाट में दी गई।

तिब्बती एवं भारतीय समुदाय के सैकड़ों लोगों ने डॉक्टर येशी ढोंडेन को Emotional अंतिम विदाई दी। डॉक्टर येशी ढोंडेन को अंतिम विदाई देने के लिए उपायुक्त राकेश प्रजापति, एसडीएम हरीश गज्जू एवं एसपी कांगड़ा विमुक्त राजन समेत निर्वासित तिब्बतियन सरकार के कई नेता और अफसर भी वहां पहुंचे।

पद्‍म श्री अवार्ड से राष्ट्रपति के द्वारा सम्मानित किया गया

डॉक्टर येशी ढोंडेन कैंसर के अतिरिक्त ट्यूमर, एडस, सुराइसिस, हैपेटाइटिस ल्यूकेमिया आदि बहुत संगीन रोगों का इलाज भी करते थे। तिब्बती चिकित्सा पद्धति में बेहतरीन कार्य के लिए उन्हें कुछ महीने पहले भारत सरकार की तरफ से 20 मार्च 2018 को पद्‍म श्री अवार्ड से राष्ट्रपति के द्वारा सम्मानित किया गया था।

नब्ज को देख कर दी जाती थी दवाई

डॉक्टर येशी ढोंडेन ने दलाईलामा के प्राइवेट चिकित्सक के रूप में काम करने के बाद मैक्लोडगंज में अपना Private clinic खोला था। उनके पास इलाज करवाने के लिए दुनिया भर से विशेषकर कैंसर के रोगी आते थे। डॉक्टर येशी ढोंडेन रोगी के पेशाब और नब्ज को देख कर दवाई देते थे। यहां पर टोकन सिस्टम था। इस तरह से वहां रोगियों का इलाज होता था।