सोलन जिले में स्तिथ हिमालयी रेंज की सबसे पुरानी और 28 किमी लंबी “करोल गुफा”, The oldest and 28 km long “Karol cave” in the Himalayan range in Solan district

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हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से जाना जाता है, जिस का कारण यहां स्तिथ हजारो ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान, जो अपनी अपनी लोकप्रियता के लिए जाने जाते है, इन में से बहुत से ऐसे स्थान है, जो बेहद रहस्मयी है, जिन के बारे में अभी तक कोई भी उपयुक्त जानकारी प्राप्त नहीं कर पाया है, कुछ ऐसा ही एक स्थान है, हिमाचल के सोलन जिले में जो करोल भव्य गुफा नाम से जाना जाता है। यह गुफा तकरीबन 28 किलोमीटर लम्बी है। यह लोकप्रिय औरएतिहासिक गुफा जिला सोलन के करोल पर्वत पर स्तिथ है।

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इस गुफा में भगवान शिव व पांडवों ने भी तपस्यां की थी, Lord Shiva and Pandavas also did penance in this cave

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस गुफा में भगवान शिव व पांडवों ने भी तपस्यां की थी। इस धार्मिक स्थान में हर साल बहुत से श्रदालु दर्शन के लिए आते है। यहां भगत करोल जाकर इस गुफा के दर्शन करके इस गुफा में पूजा अर्चना करते है। यह लोकप्रिय गुफा समुद्रतल से 7000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस गुफा को करोल टिब्बा के नाम से भी जाना जाता है। इस करोल पर्वत के चारो ओर प्राकृतिक सौंदर्य के बहुत से अद्भुत दृश्य मौजूद है, जो इस स्थान को और भी ज्यादा खूबसूरत बनाते है।

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श्रदालुओ के लिए एक आस्था का केन्द्र, Center of faith for the faithful

इस करोल के पहाड़ी क्षेत्र में खड़े होकर सैलानियों को एक तरफ हिमालय तो दूसरी ओर मैदानी राज्यों के बहुत से अद्भुत दृश्य देखने को मिलेंगे। पर्टयक यहां से कसौली, शिमला, चायल, और साथ ही हिमाचल की बर्फ से ढ़की पहाड़ियां का मनमोहक दृश्य देख सकते है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस गुफा के साथ ही एक राधा कृष्ण का मंदिर भी स्तिथ है, जो यहां आये श्रदालुओ के लिए एक आस्था का केन्द्र है। श्रदालु इस गुफा में करीब 1 से 2 किलोमीटर तक ही अंदर जा पाते है। जिसके बाद उन्हें सांस लेने मे परेशानी आने लगती है। इस गुफा में बहुत से चमगादड़ सहित अनेक जानवर रहते है, परन्तु वो किसी को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचते।

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जर्मनी के साइंटिस्ट ने इस गुफा में किया था एक परीक्षण, German scientist did a test in this cave

एक बार एक जर्मनी के साइंटिस्ट ने इस गुफा में एक परीक्षण किया था, जब उस ने इस गुफा के अंदर प्रयोग के तौर पर रंगीन पानी डाला तो रंगीन पानी पिंजौर गार्डन के पानी के प्राकृतिक चश्मों में निकला। जिससे इस बात की जानकारी मिली की इस गुफा का दूसरा झोर पिंजौर में निकलता है। बहुत से वैज्ञानिकों की टीम भी इस गुफा का मुआयना कर चुकी है। परन्तु अभी तक कुछ ख़ास जानकारी प्राप्त नहीं हो पाई थी।

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यहां पाई जाती है बहुत सी मत्वपूर्ण जड़ी बुटीयां, Many important herbs are found here

माना जाता है की इस करोल पर्वत के ऊपर से जब हनुमान जी संजीवनी बुटी लेकर गुजर रहे थे। तो उस समय उनके हाथो से संजीवनी बुटी के पहाड़ का एक छोटा हिस्सा इस करोल पर्वत पर भी गिरा था। मान्यता है की तब से यहां पर प्रचुर मात्रा में जड़ी बुटीयां पाई जाती है। इस गुफा में बहुत से मत्वपूर्ण जड़ी बुटिया पाई जाती है। यह सोलन जिले का एक बहुत ही लोकप्रीयू स्थान बन चूका है।

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यह स्थान अपने में अद्भूत अविश्वसनीय और अकल्पनीय इतिहास को संजोए हुए है। इस गुफा व पर्वत को देखने हर साल बहुत से सैलानी यहां पहुंचते है। यदि आप भी कभी सोलन गुमने का प्लान बना रहे है तो इस स्थान मी आना ना भूले।