बाबा बालक नाथ जी का धार्मिक स्थान, Religious place of Baba Balak Nath Ji in Himachal Pradesh

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बाबा बालक नाथ हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में स्तिथ एक बहुत ही लोकप्रिय और प्रसिद्ध धार्मिक स्थान है। देवों की भूमि नाम से विख्यात हिमाचल प्रदेश में अनेक धार्मिक तीर्थस्थल मौजूद हैं। इन्हीं धार्मिक स्थलों में से एक है, प्रसिद्ध बाबा बालक नाथ जी का मंदिर। यह प्रसिद्ध मंदिर हिन्दुओ का धार्मिक स्थान है। जो हिमाचल के हमीरपुर जिले के चकमोह गांव की पहाड़ी पर स्थित एक बहुत ही खूबसूरत मंदिर है। यह भारत में स्तिथ दिव्य सिद्ध पीठो में से एक है। इस पूजनीय और लोकप्रिय स्थल को “दयोटसिद्ध” के नाम से जाना जाता है। हर साल बहुत से श्रदालु यहां दर्शन के लिए आते है।

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प्रसिद्ध धार्मिक गुफा, Famous religious cave

उस मंदिर में विराजमान बाबा बालकनाथ जी हिन्दू आराध्य हैं, बाबा बालक नाथ जी के इस लोकप्रिय मंदिर के अंदर एक पवित्र प्राकॄतिक गुफा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है, यह गुफा बाबा बालक नाथ जी का निवास स्थान है। मंदिर परिसर के अंदर बाबाजी की एक मूर्ति भी स्थित है। जो श्रदालु यहां दर्शन के लिए आते है वो बाबाजी को आटे, चीनी/गुड और घी से बना रोट चढाते हैं। घी से बना रोट यहां का प्रसिद्ध प्रसाद है।

बकरे को माना जाता है, प्रेम का प्रतीक, The goat is considered a symbol of love

हिमाचल प्रदेश में स्तिथ यह एक ऐसा मंदिर है, जहां बकरा तो चढ़ाया जाता है, परन्तु उस बकरे की बली नहीं दी जाती बल्कि उसका पालन पोषण किया जाता है। जो कि उनके प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस मंदिर की यह भी मान्यता है की इस गुफा में केवल पुरष जी अंदर जा सकते है, महिलाएं गुफा के पास तो जा सकती है मगर अंदर प्रवेश नहीं कर सकती।

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कहा जाता है की महिलाएं गुफा में प्रवेश करने के बजाय मंदिर के सामने बने चौबारे से दर्शन कर मन्नतें मांगती हैं। माना जाता है जो भी सच्चे मन से यहां दर्शन के लिए आता है, उस की सभी मुरादे पूर्ण होती है। ऐसा करने का केवल एक ही कारण है, दूर से दर्शन करने के पीछे बाबा जी के ब्रह्मचारी होने का कारण माना जाता है।

शाहतलाई बाबा बालक नाथ जी का ध्यानयोग स्थान, Shahtalai Baba Balak Nath Ji’s meditation place

यहां तक की इस गुफा के अंदर ना जाने की महिलाओं पर किसी भी प्रकार की कोई पावंदी नहीं है, महिलाओं की इच्छा पर निर्भर करता है, कि उन्हें अंदर जाना है या नहीं। इस धार्मिक मंदिर से करीब छहः किलोमीटर आगे एक प्रसिद्ध स्थान शाहतलाई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह मान्यता है, कि इसी जगह बाबाजी “ध्यानयोग” किया करते थे। कहा जाता है कि बाबा बालक नाथ के बारे में मान्यता है कि इनका जन्म सभी युगों में हुआ है और हर एक युग में इन्हें अलग-अलग नाम से जाना गया है। सत युग में बाबाजी को युग में “कौल” और द्वापर युग में “महाकौल” के नाम से जाना गया।

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बाबा बालक नाथ जी मंदिर आने के साधन, Means to visit Baba Balak Nath Ji Temple

हिमाचल प्रदेश का यह हमीरपुर जिला जहां प्रसिद्ध बाबा बालक नाथ जी मंदिर है, यह जिला धार्मिक स्थल सड़क मार्ग से हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों से अछि तरह जुड़ा हुआ है। तथा अन्य पड़ोसी राज्यों के सभी प्रमुख शहरों से भी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। इस स्थान में आने के लिए आप टैक्सी की सेवा भी ले सकते है। इस मंदिर से नजदीकी रेलवे स्टेशन लगभग 65 किलोमीटर की दुरी पर स्तिथ ऊना जिले में है, यहां से निकटतम हवाई अड्डा लगभग 125 किलोमीटर की दुरी पर धर्मशाला के पास गग्गल (कांगड़ा) में स्थित है।