हिमाचली वास्तुकला का अद्भुत प्रमाण “बिज्जत महाराज मंदिर”, Amazing proof of Himachali architecture in Himachal Pradesh – Bijjat Maharaj Temple (Sarahan)

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“बिज्जत महाराज मंदिर” हिमाचल प्रदेश के जिला किन्नौर में स्तिथ एक बहुत ही प्रसिद्ध और अद्भुत कला से निर्मित एक धार्मिक स्थान है, यह मंदिर सराहन गांव के हम्बल घाटी में स्थित है, और चोपाल शहर से यह स्थान 26 किलोमीटर की दुरी पर स्तिथ है, सदियों पुराना बिज्जत महाराज मंदिर यहां के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों में से एक है, यह लोकप्रिय मंदिर खूबसूरत खेतों, सेब के बागों, छोटे गांवों और जंगल से घिरा हुआ है, यह मंदिर देवदार और चूड़धार चोटी के ट्रेक के शुरुआती बिंदुओं में से एक है। इस मंदिर परिसर में दो समानांतर ऊंची इमारत है। जो यहां आये श्रदालुओ को अपनी ओर आकर्षित करता है।

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उल्लेखनीय स्मारक में से एक, One of the notable monuments

हिमाचल में स्तिथ “बिज्जत महाराज देवता” को बिजली के देवता के रूप में भी जाना जाता है, मंदिर परिसर में कई इमारतें हैं, और यह सभी सभी दोहरीकृत हैं, जो बेहद आकर्षित और खूबसूरत है। सराहन में बिज्जत महाराज का जुड़वां मंदिर है, जो हिमाचल प्रदेश के सबसे उल्लेखनीय स्मारक में से एक माना जाता है। यह इस क्षेत्र में मुख्य देवता है, यहां के निवासियों के लिए यह बहुत ही मान्यता रखते है, इस देवता को समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के भगवान के रूप में देखा जाता है। यहां अप्रैल के महीने में यहां बिशु मेले का आयोजन किया जाता है, जो यहां आये श्रदालुओ को अपनी और आकर्षित करता है।

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16 वीं शताब्दी में निर्मित यह धार्मिक स्थान, This religious place built in the 16th century

सराहन सतलुज नदी के किनारे स्तिथ एक बहुत ही लोकप्रिय पर्टयन स्थान है। सराहन की पहचान पुराणों में वर्णित शोणितपुर से की जाती है। सराहन बुशहर साम्राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी भी रही है, रामपुर बुशहर को शीतकालीन राजधानी माना जाता है। इस लोकप्रिय मंदिर का निर्माण 16 वीं शताब्दी के प्रारंभ में सिरमौर के महाराजा महीप्रकाश ने करवाया था। इस मंदिर में एक सुंदर प्रांगण है, जो अपनी अप्रतिम सुंदरता को कैद करता है। यह मंदिर वास्तुकला मंदिर तिब्बती, बौद्ध और हिंदू शैली की वास्तुकला से प्रभावित हिमाचली शिल्प कौशल की उत्कृष्ट कलाकृति को प्रदर्शित करता है। मंदिर परिसर में कई इमारतें हैं और सभी दो ऊंची मीनारों को छोड़कर दो मंजिला हैं, जो सभी से ऊपर उठती हैं।

हजारों की संख्या में तीर्थयात्री यहां दर्शन के लिए आते है, Thousands of pilgrims visit here

हर साल बहुत से श्रदालु हजारों की संख्या में तीर्थयात्री यहां दर्शन के लिए आते है। इस मंदिर परिसर के अंदर श्रदालुओ को फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है, इस मंदिर के प्रवेश द्वार को प्राचीन सिक्कों से सुशोभित किया गया है, इस मंदिर में एक विशिष्ट डिजाइन वाली संकीर्ण लकड़ी की सीढ़ियाँ भी स्तिथ हैं और आपको मंदिर की पहली मंजिल तक ले जाती हैं। केवल बाएं टॉवर (अंदर से) जनता के लिए खुला है और दूसरा बंद रहता है। दूसरी सीढ़ी पर चढ़ने के बाद आप ड्रमों को लटका हुआ देखेंगे। तीसरी सीढ़ी उस कमरे की ओर जाती है जहां मूर्तियों को सोने और चांदी के आभूषणों में रखा जाता है।