पीर पंजाल रेंज का दूसरा सबसे ऊँचा “चोबिया दर्रा ट्रेक”, “Chobia Pass Trek” second highest in Pir Panjal Range

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हिमाचल प्रदेश में बहुत से लोकप्रिय पर्टयक स्थान है, जो अपनी लोकप्रियता और खूबसूरती के लिए जाने जाते है, कुछ एक ऐसा यही एक स्थान है, हिमाचल की पीर पंजाल के पहाड़ो में पीर पंजाल एक उच्च पर्वत माला माला है, जो ज्यादा तर बर्फ से ढकी रहती है, इसी पर्वत माला में एक प्रसिद्ध ट्रेक मार्ग है, जिसे चोबिया दर्रा ट्रेक के नाम से जाना जाता है, यह ट्रेक हिमाचल प्रदेश में दूसरा सबसे अधिक ऊंचाई वाला पास है, चोबिया दर्रा एक पेचीदा और साहसिक ट्रेकिंग स्थान है, जो बेहद रोमांचित और लोकप्रिय माना जाता है, इस ट्रेक पर आने के लिए ट्रेकिंग का अनुभव होना जरूरी है।

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गद्दी (चरवाहे) करते है सबसे पहले इस ट्रेक की यात्रा, Gaddis (shepherds) first travel this trek

इस लोकप्रिय ट्रेक में ट्रैकर पीर-पंजाल रेंज की खूबसूरती को निहार सकते है। इस दर्रे को ज्यादा तर गद्दी समुदाय के लोग इस्तेमाल करते है, माना जाता है, इस ट्रेक पर सबसे पहले गद्दी चरवाहे अपनी बकरियों को लेकर गुजरते है, उस के बाद ही यह ट्रेक अन्य पर्टयक और पर्वतआरोही इस ट्रेक पर जाते है, मान्यता है की यह चरवाहे हर साल इस दर्रे से होकर गुजरते है, इन को रास्ते और पहाड़ो का अधिक ज्ञान होता है, जिस की बजह यह है की यह अपना ज्यादा तर समय पहाड़ो में गुजारते है।

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भारी मात्रा में होती है बर्फ़बारी, There is a lot of snow

हर साल गद्दी (चरवाहे) अपनी भेड़ बकरियों के साथ, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और ऊना जिले के निचले इलाकों में छह महीने बिताने के बाद भरमौर आते हैं, जिसका कारण यहां का मौसम है, सर्दियों के समय में बर्फबारी के दौरान यहां की पहाड़ियों में अधिक पर बर्फ पद जाती है, और रास्ते भी बंद हो जाते है, जैसे ही गर्मियों के समय बर्फ पिघलना शुरू होती है, चरवाहे कुगती और चौबिया दर्रे से होकर लौहल और स्पीति की ओर अपने भेड़ो और बकरियों को चराने के लिए जाते हैं।

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देवी मराली की पूजा की जाती है इस दर्रे पर, Goddess Marali is worshiped at this pass

इस दर्रे की यह मान्यता है, की चरवाहे सुरक्षित और आसान क्रॉसिंग के लिए देवी मराली की पूजा करते है, जब वो चोबिया दर्रा पार कर रहे होते हैं, तो गद्दी कुछ भेड़ों की बलि भी देते हैं। उनका मानना है की ऐसा करने से उन की यात्रा सफल हो सके, यह इन की एक धार्मिक प्रथा मानी जाती है। चोबिया दर्रा पीर पंजाल रंग की 2 छोटी चोटियों “टेंट पीक” (6133 मी) और “बाराकंडा पीक” (5877) के बीच एक प्रसिद्ध स्थान है।

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प्रकृति के सौंदर्य से भरपूर स्थान

इस ट्रेक पर आने से पहले सैलानियों को ट्रेकिंग की बुनियादी बातों का अच्छा ज्ञान होना आवश्यकता है। सैलानी इस ट्रेक के दौरान पीर पंजाल की विशिष्टता को देख सकते हैं, यह बहुत ही रोमांचित ट्रेक है, जो प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है, पर्टयकों यहां स्थानीय निवासियों के रीति-रिवाजों का पता लगा सकते हैं, जिन्हें गद्दी जनजाति के रूप में भी जाना जाता है। यह समुदाय को पहाड़ो का राजा कहा जाता है, यह गद्दी जनजाति एक बहुत ही प्रसिद्ध जाती है, यदि आप इस ट्रेक पर आ रहे है, आने का प्लान बना रहे है, तो आप को बहुत सी बातो को ध्यान में रखना होता है, तभी आप इस खूबसूरत ट्रेक पर प्रकृति की खूबसूरती का आनंद ले सकते है।

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चोबिया दर्रा ट्रेक” आने का सही समय और दुरी, Chobia Pass Trek “Right time to visit

सर्दियों के समय में यहां भारी मात्रा में बर्फबारी होती है, जिस बजह से यह ट्रेक बंद हो जाता है, सर्दियों के समय यह दर्रा थोड़ा जोखिम भरा होता है। यह ट्रेक भरमौर के व्यस्त स्थान से शुरू होता है। इस ट्रेक को आप 7 से 8 दिनों में पूरा कर सकते है, पर्टयकों को इस ट्रेक के मार्ग में प्रमुख आकर्षण भरमानी माता मंदिर, कथेदु मंदिर और बहुत से कैंप मिलेंगे जपो बेहद आकर्षित और लोकप्रिय होते है। यह ट्रेक सुखदायक और प्रकृति की निर्मलता के बीच सुंदरता में डूबने के लिए ट्रेकर्स के लिए एक आदर्श स्थान है। इस दर्रे की ट्रेकिंग के लिए जून का महीना सबसे अच्छा महीना माना जाता है।