चम्बा और काँगड़ा में स्तिथ एक लोकप्रिय और प्रसिद्ध “गद्दी समुदाय”, Popular and famous “Gaddi community” in Chamba and Kangra

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हिमाचल प्रदेश अपने प्राकृतिक सौंदर्य और सुखद वातावरण के लिए देश-विदेश में जाना जाता है, बर्फ से ढके धौलाधार,पीर पंजाल, शिलालिक के ऊँचे-ऊँचे पहाड़ का दृश्य यहां गुमने आये सैलानियों को बेहद रोमांचित करता है। कल-कल करती नदियाँ, खूबसूरत झरने और बहुत से अद्भुत और प्रसिद्ध पर्टयक स्थान है। यदि आप खूबसूरत वादियों के बात करो तो हिमाचल का नाम सबसे पहले आता है, हर साल लाखो के मात्रा में सैलानी यहां गुमने और समय व्यतीत करने के लिए आते है, हिमाचल पर्टयन स्थानों के साथ साथ धार्मिक स्थलों के लिए भी जाना जाता है। जिस का कारण यहां बसे निवासियों की अटूट श्रद्धा और भगवान के प्रति विश्वास है, यही कारन है है की हिमाचल को देव भूमि के नाम से जाना जाता है।

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ऐतिहासिक और पौराणिक जानकारी, Historical and mythological information

हिमाचल प्रदेश बेहद ऐतिहासिक राज्य है, जहां बहुत से राजा महाराजो ने राज किया, फिर चाहे वो मुगल वंश हो, सिख हो या ब्रिटिश हो बहुत विभिन्न धर्मो के राजाओ ने यहां अपना शाशन किया, और अपने-अपने राज्य के क्षेत्र को भगौलिक रूप से बांटा था। यहां बहुत से ऐसे स्थान है, जो बेहद रोमांचित और लोकप्रिय है। उन्हें में से एक है, चम्बा जिला और काँगड़ा जिला। जिस में यह अनोखी प्रजाति निवास करती है।
हिमाचल का इतिहास, गद्दियों समुदाय को मुस्लिम आक्रमर्णों के कारण पहाड़ों की ओर भाग कर आने वाले खत्री जाति के लोग मानते हैं।
पंरतु कहि ना कहि यह बात असत्य सी लगती है, गद्दी जनजाति एक बहुत ही ऐतिहासिक और पुरानी जनजाति है, वास्तविक गद्दी जजाती केलोग अति प्राचीन और हिमाचल के मूल निवासियों में से एक हैं। इस जनजाति का जन्म हिमाचल में ही हुआ था। जो पहाड़ी क्षेत्रो में रहते थे।

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विश्व प्रसिद्ध समुदाय, World famous community

हिमचाल प्रदेश में बहुत से अद्भुत लोकप्रिय और विश्व प्रसिद्ध समुदाय निवास करते है,जो अपने कला, सांस्कृति, त्यौहार, मेले, रहन-सहन, भाषा, पकवान और भी बहुत से अन्य प्रसिद्ध चीजों के लिए जाने जाते है, हिमाचल के हर जिले में विभिन्न-विभिन्न प्रकार के समुदाय के लोग रहते है, आज हम आप को एक ऐसे ही लोकप्रिय समुदाय के बारे में बताने जा रहे है, जो भारत में ही नहीं पुरे विश्व भर में अपने एक अलग पहचान बना चूका है, इस लोकप्रिय समुदाय का नाम है (गद्दी समुदाय) गद्दी जनजाति ज्यादा तर हिमाचल के काँगड़ा और चम्बा जिले में निवास करती है।

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मुख्य व्यवसाय, Core business

गद्दी जनजाति चंबा के भरमौर क्षेत्र के निवासी माने जाते है। परन्तु बहुत से गद्दी समुदाय के लोग चम्बा और काँगड़ा आ कर बस गए है। यह लोकप्रिय जनजाति धौलाधार की पहाड़ियों के किनारे बसतेे हैं। इस बात की जानकारी गद्दियों के पौराणिक और पंरपरागत विशेष पहनावे से प्रमाणित हो जाती है। इस जनजाति के लोग अति प्राचीन माने जाते हैं। गद्दी लोग भेड़ बकरियां पालने का मुख्य व्यवसाय करते हैं।

खानाबदोश (घुमंतू) नाम से विख्यात, Known as nomadic (nomad)

इस खूबसूरत और लोकप्रिय जनजाति को खानाबदोश (घुमंतू) के नाम से भी जाना जाता है। क्युकी इस जाती का मुख्य व्यवसाय भेड़ बकरियां पालने और उन से प्राप्त ऊन से बने वस्त्रो का व्यापार था। जिस के लिए वो एक स्थान से दूसरे स्थान घूमते रहते थे। इस जनजाति के लोग गर्मियों के समय में अपनी भेड़-बकरियों के साथ पहाड़ों पर विचरण करते हैं, और सर्दियों में वे मैदानी इलाकों में इधर-उधर घूमते हैं।

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गद्दी निवासियों का बास चम्बा और काँगड़ा जिले में है, Gaddi residents have their bass in Chamba and Kangra districts

कुछ लोगों का मानना है कि इस जाती का स्थाई ठिकाना नहीं था, तो यह कथन प्राप्त जानकारी के अनुसार कहि ना कहि असत्य प्रतीत होता है, इस जाति के लोग पहाड़ो में निवास करते है, और सर्दियों के दौरान अधिक बर्फबारी होने की बजह से निचले क्षेत्र में आते थे। यही कारण है की अभी भी बहुत से गद्दी निवासियों का बास चम्बा और काँगड़ा जिले में है।

बेहद कठिन जीवन व्यतीत करते है इस जन जाती के लोग, People of this tribe live very hard lives

गद्दी समुदाय अपने आप में एक बहुत ही अलग और अद्भुत समुदाय है, इस जनजाति के लोग अपने व्यवसाय और अपने कार्य को लेकर बहुत प्रसन्न रहते है, यदि कोई आप को बोले की आप को एक या दो महीने के लिए पहाड़ो में बिना किसी महत्वपूर्ण साधन के रहना है तो आप इस बात पे विचार जरूर करेंगे। परन्तु इस जनजाति के लोग कही महीनो घर से दूर ऊँचे-ऊँचे पहाड़ो में घूमते रहते है, बिना किसी साधन के बारिश हो या तूफ़ान बर्फबारी हो या भूस्खलन यह हर चुनौतियों से लड़ने की हिम्मत रखते है।

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बचपन से ही करते आ रहे ट्रेकिंग, Trekking since childhood

आज के समय में लोग पहाड़ में ट्रेकिंग करने के लिए आते है, जिसका अधिकतम समय 5 से 10 दिनों का मान लो, और उसे में उन्हें बहुत से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जब की उन के साथ एक पूरी टीम गए होती है, मगर इस जनजाति के लोग तो बचपन से ही ट्रेकिंग करते आ रहे है। और यह सिलसिला काफी सालो से चला आ रहा है। अभी भी कोई भी सैलानी यदि पहाड़ो की यात्रा में आता है, तो पहले गद्दी समुदाय के लोग यह आ से गुजरते है।

गद्दी समुदाय विशेष कर अपने आधुनिकताओं के लिए भी जाना जाता है, The Gaddi community is particularly known for its modernities

उस के बाद इन रास्तो में से होकर पर्टयक या पर्वतारोही इन्ही रास्तो की सहारे यहां से दर्रे या पास को पार करते है। इस जनजाति के लोग आजीविका के लिए भेड़, बकरी, खच्चरों और घोड़ों का भी इस्तेमाल करते है। यह समुदाय विशेष कर अपने आधुनिकताओं के लिए भी जाना जाता है। गद्दी समुदाय के ऊपर बहुत सी डोक्युमेंट्री बनी हुई है, जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत प्रसिद्ध हुई है। यह गद्दी चरवाहों के ऊपर बनाई गयी है। की कैसे वो इतना कुछ सहन कर के भी सरल जीवन व्यतीत करते है।

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गद्दीयो की सुरक्षा करता है, गद्दी कुत्ता, Padding dog protects

हिमाचल प्रदेश के इस लोकप्रिय गद्दी समुदाय के लोग अपनी भेड़ बकरियों की सुरक्षा के लिए कुत्ते पालते हैं, जिन्हे गद्दी कुत्ता कहते है, यह बेहद खूंखार होते है, जो भेड़-, कीबकरियों को खदेड़कर एक जगह पर इकठ्ठा करने में पारंगत होते हैं। यह इतने शक्तिशाली होते है, की वे तेंदुओं तक से भिड़ जाते हैं। और उन्हें भाग खदेड़ते है। वैसे तो यह बहुत ही सरल स्वभाव के होते है, परन्तु संकट आने पर यह बहुत ही खूंखार बन जाते है।

गद्दी समुदाय द्वारा मनाये जाने वाले प्रसिद्ध त्यौहार, Famous festivals celebrated by the Gaddi community

यह लोकप्रिय जनजाति लोहड़ी के त्यौहार को बहुत ही धूम धाम से मनाते है। लोहड़ी के दिन इस जनजाति के लोग चावल में साबुत उड़द की दाल को मिलाकर खिचड़ी बनाते हैं, जिसे देसी घी के साथ परोसा जाता है, जो बेहद स्वादिस्ट होती है। गद्दीयो का एक प्रसिद्ध और पवित्र त्यौहार शिवरात्रि भी है, यह त्यौहार फागुन में मनाया जाता है, यह फरवरी महीने और मार्च के महीने के बीच में होता है। गद्दी जनजाति के बहुत से लोग इस दिन उपवास रखते हैं, इस दिन वो अपने आप को अनाज से दूर रखते हैं। इन उत्सवों के गद्दी जनजाति के लोग होली और जन्माष्टमी भी बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। गद्दियों का विशेष मेला मिंजर भरमौर यात्रा और सुई है।

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बेहद शांत सवभाव के होते है यह लोग, These people are very quiet nature

इस जनजाति के लोग बहुत ही शांत सवभाव के होते है, जो अपना सरल जीवन व्यतीत करते है, मगर समय के साथ-साथ इस जनजाति के लोग आगे उभर रहे है, बहुत से लोग एक अछि-अछि जगहों में पहुंचे हुए है, इस गद्दी जनजाति के लोग हर सिविल प्रतियोगिता में भी सफल हो रहे है, डाक्टर, इंजिनीयर, और भी बहुत से स्थानों में पहुंचे हुए है। हिमाचल में स्तिथ यह जनजाति एक लोकप्रिय और प्रमुख जनजाति मानी जाती है।

भगवान शिव के सबसे करीबी श्रदालु,The closest devotees of Lord Shiva

गद्दी जनजाति के लोग भगवान शिव को बहुत मानते है, पौराणकि मान्यता के अनुसार गद्दी समुदाय के लोगो को भगवान शिव के सबसे नजदीक माना जाता है, गद्दी जनजाति के लोगो का सबसे लोकप्रिय धार्मिक त्यौहार शिव भगवान का (नुआला) होता है, जिस में पूरी रात भगवान शिव के भगत शिव की पूजा अर्चना करते है, और पूरी रात शिव के भजन गाये जाते है। इस इस समुदाय का सबसे पवित्र और धार्मिक त्यौहार माना जाता है।

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गद्दी समुदाय का प्रसिद्ध विवाह, Famous marriage of the Gaddi community

इस समुदाय के लोगो की शादी भी बहुत खूबसूरत तरीके से होती है, मान्यता है की भगवान् शिव की भी शादी पार्वती जी के साथ इसी रीती रिवाज के साथ हुई थी, इसी लिए इस समुदाय के लोग अपने हर शुभ काम में पहले शिव की पूजा अर्चना करते है। शादी के दौरान दूल्हा और दुल्हन की पोशाक बहुत ही आकर्षित होती है, दूल्हे की पोशाक को चोला और दुल्हन की पोशाक को नुआचडी कहते है।

गद्दी समुदाय के स्वादिस्ट पकवान, Swaddist dish of the Gaddi community

गद्दी समुदाय के लोग घर में विशेष त्योहारों में ख़ास तरह के पकवान बनाते है, जिन्हे बब्रु, मिठ्ड़ू, मट्टी, इत्यादि बहुत से स्वादिष्ट पकवान बनाये जाते है, इस समुदाय के लोग घर की देसी मदिरा बनाते है, जिसे झोल,लुगड़ी, थरड़ा कहते है। जो बहुत ही लोकप्रिय माना जाता है। इस समुदाय की भाषा को गद्दियाली बोला जाता है, यह एक बहुत ही सरल और अनोखी भाषा मानी जाती है।