1849 में निर्माणित ऐतिहासिक “डगशाई जेल” जहां कैदियों की रूह तक कांप जाती थी, Historic Dagshai Jail, built in 1849, where prisoners’ souls trembled

Dagshai_Jail_(1)

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्तिथ डगशाई जेल बहुत पुराने छावनी क्षेत्रों में से एक है। इस स्थान में पहले एक तिहाड़ जेल हुआ करती थी। यह अब एक संग्रहालय में बदल चुका है। इस लोकप्रिय जेल की सबसे ख़ास बात यह है कि इसमें हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी ने भी एक दिन का समय बिताया था। इसी दग्शाई जेल में म्यूज़ीयम पुराने ज़माने में अँग्रेज़ी सरकार की जेल हुआ करती थी।

लगभग 54 तिहाड़ जलखाने हैं, There are about 54 Tihar reservoirs

इस जेल में लगभग 54 तिहाड़ जलखाने हैं, इस भयानक जेल में 16 जेलखानों का उपयोग कठोर दंड देने के लिए किया जाता था। इस जेल में जलखानों तक बहुत मुश्किल से हवा अंदर आ पाती है, इस स्थान में स्तिथ इन जेलों को अँधेरी गुफा भी कहा जाता है। जिसका कारण यह की यहां किसी भी जगह से प्रकाश के अंदर आने का कोई स्रोत नहीं है।

Dagshai_Jail_(2)

ब्रिटिशकाल की इस जेल में रौशनी तक अंदर नहीं आती थी, In this British-era prison, the light did not come in

यह जेलखाना खास तौर पर उच्च दंड देने के लिए बनाया गया था, ब्रिटिशकाल के जेलों में अंग्रेजों के जुल्मों से आज भी दिल सहम उठता है। इस जेलखाने के अंदर 3 दरवाज़े हैं। यह लगभग 3 फीट ही बड़ा है। कहा जाता है की जब एक बार अगर किसी कैदी को वहाँ के एक दरवाज़े से अंदर डाला दिया जाता था, उसके बाद बाकी के दरवाज़े भी बंद कर दिए जाते थे। जिससे कैदी की हर हलचल पर नजर रखी जाती थी। इस ब्रिटिश सरकार द्वारा निर्मित जेलखाने में जगह बहुत कम होने की वजह से कैदी यहां एक ही जगह में भी ठीक से खड़े नहीं हो सकता था। इस जेल को विशेष रूप से इस लिए बनाया गया था। उस समय जो भी अँग्रेज़ी शासन को चुनौती देता था उसे इस जेल में डाल दिया जाता था।

Dagshai_Jail_(3)

दाग-ए-शाही नाम से विख्यात, Famous as Dag-e-Shahi

यह जेल सबसे कठोर दंड देने के लिए जाने जाती थी। मान्यता है की दग्शाई का यह नाम दाग-ए-शाही (राजसी निशान) नाम पर रखा गया था। इस जेल की एक और कठोर मान्यता थी की यहां अपराधियों को दग्शाई के इस जेल में भेजने से पहले उन्हें माथे पर गर्म लोहे की छड़ से एक राजसी निशान लगा दिया जाता था। जिसे दाग-ए-शाही कहते थे। स्वतंत्रता के समय जिन देशभगतो को इस जेल में डाला गया था। उस समय महात्मा गाँधी उन्हें नैतिक समर्थन देने के लिए एक दिन के लिए इस जेल में उनके पास रहने गये थे।

 

जेल म्यूज़ीयम का निर्माण, Construction of prison museum

हिमाचल प्रदेश के टूरिज़्म विभाग और यहां के ब्रिगेड कमांडर की मदद से इस जेल में स्तिथ म्यूज़ीयम को अच्छी तरह से संभाला गया है। कहा जाता है की यह अंडमान के तिहाड़ जेल के बाद भारत का दूसरा सबसे लोकप्रिय जेल म्यूज़ीयम है। इस लोकप्रिय म्यूज़ीयम में बहुत से ऐतिहासिक ज़माने की कई कलाकृतियां, तोपखाने, तस्वीरें, और उपकरण और कई अन्य भारत के इतिहास से संबंधित दस्तावेज़ रखे हुए हैं। यदि आप को को भी इतिहास संबंदित वस्तुओ से लगाव है, तो आप के लिए यह एक बहुत ही उपयोगी स्थान हैं।

कठोर सज़ा और यातनाएं दी जाती थीं, Harsh punishment and torture

यहां आकर आप को यह महसूस होगा की उस ज़माने में कैदियों को कितनी कठोर सज़ा और यातनाएं दी जाती थीं।भारत देश को कैसे स्वतंत्रता मिली है आप को इस स्थान में आप के ज्ञात होगा यह स्थान किसी नर्क से काम नहीं है। स्वतंत्रता सैनानियों द्वारा हमारे देश को आज़ादी दिलाने के लिए क्या क्या किया गया था। यहां आकर आप को पता चलेगा। इस स्थान में आकर आप अपने इतिहास को और करीब से जान सकेंगे।