जिला किन्नौर में स्तिथ एक ऐतिहासिक “मथि मंदिर”, Historical “Mathi Temple” district Kinnaur – Himachal Pradesh

मथि मंदिर मंदिर जिला किन्नौर में स्तिथ सबसे ऐतिहासिक और प्रसिद्ध स्थानों में से एक है, यह यहां के स्थानीय लोगों की कुल देवी है। इस प्रसिद्ध मंदिर परिसर में तीन मंदिर स्तिथ हैं, जिनमें से यह धार्मिक मंदिर सबसे पुराना माना जाता है, इस मंदिर का निर्माण लगभग पांच सौ साल पहले गढ़वाल के निवासी ने किया था। इस लोकप्रिय मंदिर में एक सन्दूक स्तिथ है, जो अखरोट की लकड़ी से बना हुआ है, यह संदूक यहां आये श्रदालुओ के लिए एक बहुत ही आकर्षित स्थान है, यह संदूक कपड़े और याक की पूंछ से ढका होता है। इसे ढोने के लिए दो डंडे इस सन्दूक में डाले गए हैं।

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, According to mythological belief

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान बद्रीनाथ की पत्नी मति ने एक बार बृंदावन से अपनी यात्रा शुरू की और मथुरा और बद्रीनाथ के माध्यम से वह तिब्बत पहुंच गई। उस के कुछ बीतने के बाद में वह गढ़वाल आ गई और सिरमौर से होते हुए वह बुशहर के सरहान पहुंची। इसके साथ ही उसका अंतिम गंतव्य बरुआ खड्ड था। उस के साथ ही बरुआ खड्ड से आगे जाने के दौरान, उसने पाया कि यह भूमि सात भागों में विभाजित है। नरेनस, उसका भतीजा शुआंग ग्राम का देवता था।

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किन्नौर जिले के अंतिम गांव छितकुल में स्तिथ यह मंदिर, This temple in Chitkul, the last village in Kinnaur district

इसके साथ ही उसने उसे गाँव का रक्षक नियुक्त किया। बाद में वह चाऊस गांव की ओर चली गईं। नरसेन चाऊस गाँव के देवता भी थे। इसलिए उसने उन्हें चासू में नियुक्त किया। बाद में उन्होंने कमरू किले का दौरा किया जहां बद्रीनाथ बुशहर के सिंहासन की रक्षा कर रहे थे। इस प्रक्रिया में देवी ने इस घाटी के सभी सात क्षेत्रों की रक्षा की और अंत में वह छितकुल पहुंच गईं और माठी मंदिर में बस गईं। उसके छितकुल आने के बाद गाँव समृद्ध होने लगा। यह लोकप्रिय स्थान किन्नौर जिले में स्तिथ बहुत ही लोकप्रिय स्थान है। हर साल बहुत से श्रदालु यहां दर्शन के लिए आते है।

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