देव घाटी में स्तिथ एक लोकप्रिय पर्टयक स्थल “रसोल-गांव “, “Rasol-Village” Dev Valley of Himachal Pradesh

रासोल-पास ट्रेक हिमाचल प्रदेश की देव घाटी कुल्लू जिले में स्तिथ एक बहुत ही लोकप्रिय पर्टयक स्थल है, यह ट्रेक रसोल में स्तिथ की ऊंचाई समुंद्रतल से लगभग (3,048 मीटर) है। यह एक कायाकल्प ट्रेक है। यहां की यात्रा करने के लिए सही समय और राशोल ट्रेक की यात्रा करने का सही समय अप्रैल से दिसंबर के महीने में होता है। इस ट्रेक के नजदीक बेस कैंप से सबसे नजदीकी गांव छाल है। इस रसोल ट्रेक की लंबाई 8 किमी की है, राशोल ट्रेकिंग एक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर और प्यारा दृश्य प्रस्तुत करता है। यदि आप एक शांत वातावरण और शीतल हवाओ को महसूस करना चाहते हो तो आप लिए यह एक आदर्श स्थान साबित होगा।

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एक शांत और खूबसूरत स्थान, A quiet and beautiful place

यदि आप एक एक शांत और प्राकृतिक सौदंर्य के तलाश में है, तो आप के लिए यह गांव एक सही गांव साबित होगा। यह स्थान भीड़ भाड़ और पार्वती घाटी में एक बेरोज़गार गंतव्य से दूर स्तिथ एक एकांत स्थान है। रसोल ट्रेक की शुरुआत गांव छाल से होती है। जो एक बहुत ही खूबसूरत स्थान है। राशोल पहुंचने के लिए पर्टयकों को 4-5 घंटे का समय लगता हैं। यहां एक बेहद शानदार नज़ारों के साथ पगडंडी खड़ी है। पर्टयक यहां ताजी हवा में सांस लें सकते है, जो आप को बेहद सकून प्रदान करेंगी। यहां गुमने आये सैलानी अल्पाइन जंगलों और छोटी धाराओं के माध्य चलने का आनंद ले सकते है।

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गुलाबी रोडोडेंड्रॉन के खूबसूरत दृश्य, Beautiful view of pink rhododendron

पर्टयक इस खूबसूरत स्थान में लाल और गुलाबी रोडोडेंड्रोन पेड़ों के खूबसूरत दृश्य देख सकते है। गुलाबी रोडोडेंड्रॉन हिमाचल प्रदेश का राज्य फूल है। इस रसोल घाटी में एक बहुत धार्मिक और पौराणिक मंदिर भी स्तिथ है। यह इस गांव में एक ऐतिहासिक मंदिर है, इस गांव के बिच में पुराने लकड़ी का एक सुंदर मंदिर है। यहां आप बहुत से प्राकृतिक सौंदर्य से भरपुर स्थानों के मनमोहक दृश्य देख सकते है। यहां पर्टयक पार्वती घाटी के और भी बहुत से खूबसूरत दृश्य देख सकते है। रसोल गांव में लोग “देवी रेणुका” ऋषि परशुराम की माँ और ऋषि जमदग्नि की पत्नी) की पूजा करते हैं। रसोल एक ऐसा मनोहारी स्थान है, जहां बर्फ से ढके हिमालय के लुभावने दृश्यों के लिए निजी है, जो घाटी में गहरी बहती है। प्रसिद्ध मलाना गांव के करीब, रसोल बाहरी लोगों के लिए इतना अलग नहीं है, इसकी देहाती आकर्षण और अच्छी तरह से संरक्षित समुदाय और संस्कृति के साथ एक लोकप्रिय और खूबसूरत स्थान है।

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पर्टयकों को धार्मिक स्थलों को स्पर्श करने की अनुमति नहीं है, Tourist are not allowed to touch religious places

इस गांव में स्तिथ धार्मिक मंदिर को किसी भी बाहरी व्यक्ति को मंदिरों को छूने की अनुमति नहीं है, पर्टयक केवल यहां स्तिथ धार्मिक स्थानों को केवल देख सकते है, ऐसे ही हिमाचल में और भी बूत से धार्मिक स्थान है, जहा पर्टयक धार्मिक स्थलों को केवल देख ही सकते है, जिन में से तोश, मलाणा प्रसिद्ध है, रसोल गांव अपनी संस्कृति और इतिहास के साथ एक सुंदर गाँव है। यहां से पर्टयक सार पास और खली पास का भी अद्भुत और प्राकृतिक नजारा देख सकते हैं। वैसे तो आप यहां साल में कभी भी आ सकते है, मगर मई से अक्तूबर का समय सही माना जाता है, इस दौरान यहां का दौरा आप के लिए सही रहेगा। सर्दियों में यहां बेहद ठण्ड होती है।

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