58 फार्मा कंपनियों की झोली में गिरा, दवाएं सप्लाई का सौ करोड़ का टेंडर

himachal

हिमाचल प्रदेश के अस्पतालों में दवाएं सप्लाई करने के सरकार ने स्वास्थ्य विभाग का टेंडर फाइनलकर दिया है। इस टेंडर के दौरान 58 फार्मा कंपनियों की झोली में सौ करोड़ का टेंडर दिया गया है, यह कंपनियों अगल-अलग प्रकार की दवाओं को प्रदेश के अस्पतालों में मुहैया करवाएंगे। यह कंपनीया प्रदेश के विभिन्न अस्प्तालो में अपनी दवाई उपलब्ध करवाएगी। बताया जा रहा है, की गौर हो कि इस टेंडर में लगभग 64 कंपनियों ने भाग लिया था।

स्वास्थ्य विभाग ने फाइनल किया टेंडर

इसमें स्वास्थ्य विभाग ने फाइनांशियल बिड खुलने के बाद टेंडर फाइनल कर दिया गया है। इस बार टेंडर में खोर करने वाली बात यह है, कि नामी और ब्रांडेड कंपनियों की दवाएं हिमाचल की जनता खा पाएंगी। और अच्छी किस्म की दवाइयों का सेवन कर पाएगी। ये कंपनिय देश विदेश की टॉप टेन कंपनियां हैं, जो प्रदेश के अस्पतालों में दवाएं आबंटित करेंगी।

दो बार कैंसिल हो चुका है टेंडर

इस बार इस टेंडर की ख़ास बात यह है की यह लगभग दो बार कैंसिल किया गया था। जिस बजह से लंबे समय से अस्पतालों में दवाओं की भी खरीदारी जनता नहीं कर पा रही थी। जिस का कारण यह था, की बहुत सी कई फार्मा कंपनियों की दवाएं ही घटिया श्रेणी में आ रही थीं। जिन का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो रहा था। अभी हाल ही में दवाओं के रिकार्ड पर गौर किया जाए तो प्रदेश के अस्पतालों में बीपी और दर्द की दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।

कुछ दवाईयो पर लगाईं गयी रोक

स्वास्थ्य विभाग ने एक बीपी और दो दर्द की दवाएं बंद कर दी है। जिसे तुरंत प्रभाव से इस्तेमाल से रोका गया है। स्वास्थ्य विभाग ने द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार इसमें एक दवा टेलिमासर्टेन 40 एमजी है और दूसरी दवा का नाम आईब्रोफीन 400 एमजी और तीसरी दवा का नाम पैरासिटामोल 500 एमजी है। इन दवाओं के सबस्टैंडर्ड आने के बाद प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने आगामी कार्रवाई करते हुए ये कार्रवाई अमल में लाई गई है। इस पर प्रदेश की जनता को दी जाने जाने वाली दवाओं पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कड़ी नजर रखी जा रही है।

(World Health Organization) द्वारा मान्यता प्राप्त कंपनियों की दवाईयो का सेवन करेगी हिमाचल की जनता

पिछले कुछ समय पहले से प्रदेश में बहुत से दवाओं के सैंपल फेल होने के मामले सामने आये है। दवाओं के सैंपल फेल होने के मामले बढ़ते चले जा रहे हैं। इन सैंपल्स को कंडाघाट लैब भेजा गया था। जिसकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। रिपोर्ट आने के बाद अब आगामी वर्षो के लिए कार्रवाई अपनाई जाने वाली है।

हालांकि इस बार प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवाओं के टेंडर में डब्ल्यूएचओ की शर्त लगाई गई है।,अब टेंडर फाइनल होने के बाद डब्ल्यूएचओ (World Health Organization) की मान्यता प्राप्त वाली कंपनियों की दवाएं अब जनता को मिल पाएंगी। और वो इनका सेवन कर पायंगे।

58 pharma companies fall, 100 million tender of medicines supply