हिमाचल के प्रसिद्ध छेश्चू मेले में कोरोना वायरस का खौफ, नहीं आ पायंगे वायरस से पीड़ित देश से बौद्ध अनुयायी

हिमाचल प्रदेश का प्रसिद्ध छेश्चू मेला एक बहुत ही धार्मिक और लोकप्रिय मेला माना जाता है। इस स्थान में आठवीं शताब्दी के दौरान बौद्ध धर्म को भूटान एवं तिब्बत में ले जाने एवं प्रसार करने में भूमिका निभाने वाले बौद्ध गुरु पदमसंभव की जयंती पर बौद्धों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थल रिवालसर में मनाए जाने वाले राज्य स्तरीय छेश्चू मेले पर कोरोना वायरस का खौफ फैला हुआ है। जिस बजह से बहुत से बौद्ध अनुयायी इस मेले में शामिल नहीं हो सकेंगे।

ताइवान, चीन, थाईलैंड, नेपाल और भूटान के बौद्ध अनुयायी को निराशा

बताया जा रहा है की 03 से 05 मार्च तक मनाए जाने वाले इस मेले में इस बार देसी-विदेशी सैलानी कोरोना वायरस के खौफ के चलते नहीं पहुंच सके हैं।जिन भी देशो में यह वायरस फैला हुआ है, वहा से कोई भी व्यक्ति इस मेले में शामिल नहीं हो सकते है। इस बार धार्मिक त्रिवेणी के नाम से प्रसिद्ध पर्यटन नगरी रिवालसर सूनी पड़ी है।

गौरतलब है कि इस पावन पर्व पर हर साल ताइवान, चीन, थाईलैंड, नेपाल और भूटान से काफी संख्या में बौद्ध अनुयायी पहुंचते थे। जिस बजह से यह पूरा स्थान भरा होता था। लेकिन कोरोना के कारण इन देशों में कोई भी बौद्ध अनुयायी यहां नहीं पहुंचा सकता है। इससे हिमाचल के पर्यटन कारोबार पर भी काफी प्रभाव पड़ा है।

तीनों धर्मों का पवित्र और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल

इस लोकप्रिय छेश्चू मेले में तीनों धर्मों के श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। परन्तु कोरोना वायरस की बजह से इस बार बहुत ही कम मात्रा में इक्का-दुक्का सैलानी ही यहां पहुंच रहे हैं, उनके लिए भी जिला प्रशासन ने कुछ ख़ास पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं।

स्वास्थ्य जांच तक के लिए केंद्र का प्रावधान नहीं किया गया है। कार्यकारी एसडीएम बल्ह राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि स्वास्थ्य जांच से संबंधित व्यवस्थाओं को पूरा करने के लिए सीएमओ और बीएमओ को पत्र लिखकर सूचित किया जा चुका है।

इसके साथ ही बौद्ध धर्म के आचार्य रोशन लाल नेगी ने कहा कि कोरोना के खौफ से इस बार ताइवान, चीन, थाईलैंड, नेपाल और भूटान से सैलानी नहीं इस मेले में नहीं पहुंच सके हैं। जिस बजह से इस बार यहां लोगो में कमी आयी है। इस मेले का लोकप्रिय ‘छम्म’ नृत्य यहां का मुख्य आकर्षण का केंद्र होगा।

छम्म’ नृत्य मेले का मुख्य आकर्षण का केंद्र

यह विश्व प्रसिद्ध छेश्चू मेला तीन मार्च को सुबह 11 बजे शुरू होता है। बौद्ध मंदिर रिवालसर में पूजा अर्चना के उपरांत विधिवत रूप से मेला शुरू किया जाता है। 04 मार्च को सुबह नौ बजे ‘छम्म’ नृत्य का आयोजन किया जाएगा। उसके बाद गुरु पदमसंभव निगमापा बौद्ध मठ में मुखौटा पहनकर बौद्ध अनुयायी प्रस्तुति देंगे।

इसमें गुरु के आठ अवतारों के मुखौटे डालकर बौद्ध भिक्षु नृत्य करेंगे माना जाता है की इस से बुरी शक्तियां भगाई जाएंगी। यह बहुत ही लोकप्रिय और प्रसिद्ध हिमाचल का त्यौहार है।

The fear of the Corona virus in Himachal’s famous Chheshu fair, Buddhist followers from the country will not be able to come.

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