प्रदेश सरकार का टैक्सों में काटा केंद्र सरकार ने हिस्सा, 85% तक गिरावट

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केंद्र सरकार के करों में हिमाचल की हिस्सेदारी के रूप में इस बार प्रदेश सरकार को 367 करोड़ रुपए ही हासिल हुए हैं। प्राप्त जानकारी अनुसार केंद्र सरकार ने करों में हिस्सेदारी की यह रकम प्रदेश को भेज दी है। इसमें कटौती हुई है। हर महीने केंद्रीय करोें में लगभग 500 करोड़ रुपए की राशि की हिस्सेदारी हिमाचल को दी जाती थी। मगर इस बार यह पैसा भी कट गया है। हालांकि राज्य सरकार को कर्मचारियों के वेतन व भत्ते देने में कोई दिक्कत नहीं होगी। इस लिए राज्य सरकार के कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होगी है।

85 फीसदी की कमी दर्ज की गई

इसी के साथ जो पैसा प्रदेश सरकार के पास आया है, उसमे करों में हिस्सेदारी की जो रकम घटी है, उसे कैसे पूरा किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। यहां पर अपने करों से जो उगाही हुई थी। वह मात्र 40 करोड़ रुपए की है। इसमें 85 फीसदी की कमी दर्ज की गई है, ऐेसे में प्रदेश सरकार काम कैसे चलाएगी। ऐसे खस्ता वित्तीय हालातों में केंद्र सरकार ने भी केंद्रीय करों की हिस्सेदारी कम भेजी है।

लॉकडाउन की बजह से अर्थव्वस्था में गिरावट

इसी के साथ यहां लॉकडाउन ने मार मारी है। यहां की अर्थव्वस्था पूरी तरह से चरमरा गई है, जिस पर अब अधिकारी भी कहने लगे हैं कि लॉकडाउन खुल जाए तो बेहतर होगा। प्रदेश में कार्यरत अधिकारियों का कहना है कि हिमाचल में कोरोना के उतने मामले नहीं हैं। और स्थिति नियंत्रण में है, ऐसे में यहां पर लॉकडाउन को खोलकर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की जरूरत है। अभी तीन मई तक लॉकडाउन है, जिसके बाद क्लीयर होगा कि आगे क्या करना है। इस पर भी अभी कोई जानकारी सही डंग्ग से प्राप्त नहीं है।

लॉकडाउन खुलने से लोगों को मिलेगा रोजगार

हालांकि हिमाचल को जरूरत लॉकडाउन खोलने की है। लॉकडाउन खुलने से लोगों को रोजगार मिलेगा और यहां पर सरकार का काम भी चलेगा। यहां पर करों की उगाही नहीं हो पा रही है। पेट्रोल व डीजल से जो वैट सरकार को मिलना था। वह नहीं मिल रहा क्योंकि असेंशियल ड्यूटी वाले वाहन ही चल रहे हैं। अब धीरे-धीरे गतिविधियों को ग्रामीण क्षेत्रों तक से शुरू किया गया है।

Central government’s share of taxes cut by Himachal Pradesh government decreased by 85 percent