प्रदेश में 50 फीसदी नहीं बल्कि सभी बसें चलाने का प्रस्ताव, निगम के अफसरों ने सरकार को स्थिति स्पष्ट की, कम बसे चलाने से कोरोना का खतरा और बढ़ेगा

हिमाचल प्रदेश में 50 फीसदी नहीं बल्कि सभी सरकारी और निजी बसों को चलाने का प्रस्ताव है। प्राप्त जानकारी के अनुसार परिवहन विभाग और निगम के अफसरों ने सरकार को स्थिति स्पष्ट की है कि अगर 50 फीसदी बसें चलाई जाती हैं तो इससे बसों में सवारियों की भीड़ बढ़ेगी तथा सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का भी पालन नहीं हो पाएगा। जिस से प्रदेश में कोरोना का खतरा और बढ़ गया है। इस लिए सरकार से भी बसें चलाने का प्रस्ताव रखा है।

किराया बढ़ने से ऑपरेटरों को 40 सीट का ही किराया मिलेगा

ऐसे में प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा बसें चलाकर ही फायदा हो सकेगा। यदि बसों में अति जरूरतमंद लोग ही सफर कर सकें, इसके लिए किराया बढ़ाया जाना आवश्यक है। जिसका कारण अफसरों ने सरकार को यह भी बताया कि 40 सीटर बस में अगर 20 लोगों को बैठाया जाता है तो परिवहन निगम और निजी बस ऑपरेटरों की इनकम में कोई कमी नहीं आएगी।

किराया बढ़ने से ऑपरेटरों को 40 सीट का किराया मिलेगा। इसके साथ ही वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में 33 सौ के करीब सरकारी और 31 सौ के करीब प्राइवेट बसें हैं। यह बसें करीब ढाई महीने से सड़कों पर खड़ी हैं।

बसों को दिन में 3 बार सैनिटाइज किया जाएगा।

जिस से ऑपरेटरों को जेब से लोन की किस्तें देनी पड़ रही हैं। ऐसे में 50 निजी ऑपरेटरों की बसें चलना भी मुश्किल हो जाएगा। यदि हालत रहे तो चालकों और मालिकों पे भारी संकट आ जाएगा। इसी के साथ हिमाचल प्रदेश में परिवहन विभाग के निदेशक कैप्टन जेएम पठानिया ने कहा कि हिमाचल के सभी आरटीओ ऑफिस में सैनिटाइजर और मास्क पहुंचा दिए गए हैं।

इसी के साथ बसों को दिन में 3 बार सैनिटाइज किया जाएगा। जानकरी के अनुसार सभी जिला आरटीओ कार्यालय में कोरोना से बचाव करने का सामान उपलब्ध है। जिस से प्रदेश में फैले इस कोरोना के खतरे को कम किया जा सकता है।

Not 50 percent in the state, but the proposal to run all the buses, the officers of the corporation clarified the situation to the government that the risk of corona will increase further by running less buses.

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