प्रदेश में लगे लॉकडाउन में जोगिंद्रनगर के कारोबारियों को 30 करोड़ की चपत, दुकानें बंद होने से नहीं हो पा रहा कारोबार

हिमाचल प्रदेश में फैली वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते 22 मार्च को घोषित जनता कर्फ्यू व उसके पश्चात लॉकडाउन ने जोगिंद्रनगर के व्यापारी वर्ग की कमर तोड़ कर रख दी है। जानकारी के अनुसार 22 मार्च के पश्चात अनेक लोगों के कारोबार अभी भी बंद हैं। इसी दौरान पहली मई से जोगिंद्रनगर की दुकानें तो सात घंटों के लिए खुल रही हैं।

लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट न चल पाने के कारण मार्केट में केवल अति आवश्यक सामान लेने वाले ही बाजार में आ रहे हैं। प्राप्त जानकारीके अनुसार जोगिंद्रनगर में लगभग 450 से अधिक छोटी-बड़ी दुकानें हैं, जहां पूर्व में आम दिनों में हर माह लगभग 25 से 30 करोड़ रुपए का कारोबार होता था। जो लॉकडाउन के कारण नहीं हो पा रहा है।

लाकडाऊन के पश्चात जोगिंद्रनगर में लगभग 50-60 करोड़ का कारोबार चौपट होकर रह गया

इसी दौरान अप्रैल माह में कारोबार पूरी तरह से ठप रहा, जबकि मई माह में भी लगभग 50 से 60 प्रतिशत कारोबार ही हो पाया है। अनुमान के अनुसार लाकडाऊन के पश्चात जोगिंद्रनगर में लगभग 50-60 करोड़ का कारोबार चौपट होकर रह गया है। जिस से कारोबार में कमी होने के कारण निश्चित तौर पर सरकार के राजस्व में भी गिरावट आई है। इसी के साथ लॉकडाउन के चलते बहुत से लोगों ने रोजगार भी खोया है। तथा इसकी मार कारोबारियों के साथ दुकानों में काम करने वाले सेल्जमैन सहित मजदूर वर्ग पर भी पड़ी है।

दुकानदारों के लिए रोजी-रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो गया

इसी के साथ व्यापार मंडल जोगिंद्रनगर के प्रधान ओंकार शर्मा का कहना है कि लॉकडाउन के चलते हर व्यापारी को नुकसान उठाना पड़ा है। तथा अनेक दुकानदारों के लिए रोजी-रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो गया है। उन्होने मांग की कि सरकार आकलन कर प्रभावित दुकानदारों के लिए राहत राशि जारी करे। जिस से उन्हें इस परेशानी का सामना ना करना पड़े।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा की इस महामारी से लड़ने के लिए उन्हें सरकार द्वारा कुछ सहायता की जाए, उनकी रिजी रोटी इसी करोबार से आती है। और यदि कारोबार ही नई होगा तो तो वो अपना और घर का खर्चा कैसे चला पाएंगे।

30 crore rupees to Jogindernagar businessmen in state’s lockdown; shops are not able to do business

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