प्रदेश में हुए लॉकडाउन के कारण हजारों मछुआरों की रोजी-रोटी पर संकट, नही मिल पा रहे उचित दाम

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हिमाचल प्रदेश में हुए लॉकडाउन और कर्फ्यू के कारण इनकी आर्थिकी बिगड़ गई है। इस लॉकडाउन का असर मछली व्यवसाय पर भी पड़ रहा है। जिस की वजह से झील से मछली उत्पादन पिछले लगभग डेढ़ महीने से रुका हुआ था। जिसे से 20 अप्रैल को जिला प्रशासन ने शुरू करवाया है।

इसी के साथ जिले में मछली पकड़ने के लिए सात केंद्र बनाए गए हैं। जिनमें भाखड़ा केंद्र की मछली पंजाब भेजी जाती है। बाकी केंद्रों से प्रदेश के शिमला, ऊना, कांगड़ा, मंडी, धर्मशाला और सोलन भेजी जाती है। जिस से प्रदेश के मछवारों का व्यवसाय चलता है।

प्रदेश में करीब 2,500 परिवारों की रोजी रोटी मछली व्यवसाय से चलती

इसी के साथ लॉकडाउन के बीच हिमाचल प्रदेश के करीब दस हजार मछुआरों पर रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इसी कारण बाजार में न के बराबर मांग होने के कारण मछली व्यवसाय ठप हो गया है। जिस बजह से बहुत से व्यपारियो को हानि हो रही है।

गोबिंद सागर सहित अन्य स्थानों में मछलियों की भरमार होने के बावजूद मछुआरों के चेहरे मुरझा गए हैं। इसी के साथ स्थानीय बाजारों में भी मछली की मांग कुछ ज्यादा नहीं है। बिलासपुर में ही करीब 2,500 परिवारों की रोजी रोटी मछली व्यवसाय से चलती है।

सरकार से मदद की लगाई गुहार

लॉकडाउन के बाद झील से मछली उत्पादन पूरी तरह बंद होने से जिले के मछुआरों की कमर टूट गई है। जल में मछलियों की भरमार तो है मगर मछुआरों के परिवारों पर खाने पीने का अकाल पड़ गया है। इस व्यपारियो का कहना है की सरकार प्रदेश भर के मछुआरों के लिए भी पैकेज का ऐलान करे।

किसानों की तर्ज पर मछुआरों के लिए भी प्रदेश सरकार राहत राशि सीधे बैंक खातों में जमा करवाई जाए। जिससे मछुआरों के परिवार की आर्थिक व्यवस्था में सुधार आ सके। इसी के साथ मार्च 31 तक मछली के रेट ठीक मिलते थे, लेकिन लॉकडाउन से सब खत्म हो गया।

Crisis on livelihood of thousands of fishermen due to lockdown in the state, not getting fair price

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