लोकसेवा आयोग ने क्लास वन और टू की चयन प्रक्रिया में किया बड़ा बदलाव, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए साल 1971 में बनी चयन प्रक्रिया में बदलाव

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हिमाचल प्रदेश लोकसेवा आयोग ने क्लास वन और टू की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए साल 1971 में बनी चयन प्रक्रिया में बदलाव कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिन पदों को भरने के लिए आरएंडपी नियम स्पष्ट नहीं है। उनको सिर्फ इंटरव्यू के अंकों के आधार पर नहीं भरा जाएगा। इसमें अब लिखित परीक्षा के 65 फीसदी और इंटरव्यू के 35 फीसदी अंकों के आधार पर उम्मीदवारों का चयन होगा। इसी के साथ आयोग ने बुधवार को आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल डीवीएस राणा की अध्यक्षता में हुई सदस्यों की बैठक में इसे मंजूरी दी गई। जिस में यह निर्णय लिया गया तथा भर्ती प्रक्रिया में बदलाव किया गया।

मेजर जनरल राणा ने दी जानकारी

इसी के साथ मेजर जनरल राणा ने बताया कि नई व्यवस्था बोर्डों, निगमों के विभिन्न पदों सहित असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर असिस्टेंट इंजीनियरों, डॉक्टरों, कृषि विकास अधिकारी, बागवानी विकास अधिकारी, के पदों की भर्ती के लिए है। इसी के साथ पहले इन पदों के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट होते थे। इस परीक्षा के आधार पर छंटनी की जाती थी।

इसी दौरान यह नंबर मेरिट में शामिल नहीं होते थे। एक पद के लिए टॉप तीन चुने जाते थे। नौकरी के लिए चयन इंटरव्यू के अंकों पर निर्भर था। साथ ही इंटरव्यू के अंक बराबर होने की स्थिति में ही लिखित परीक्षा के अंक देखे जाते थे। लेकिन इस में अब बदलाव कर दिए गए है।

सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 30 फीसदी और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को 25 फीसदी अंक लेने होंगे

जानकारी के अनुसार अब लिखित परीक्षा में सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 30 फीसदी और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को 25 फीसदी अंक लेने होंगे। साथ ही इंटरव्यू में सामान्य वर्ग के लिए 45 फीसदी और आरक्षित वर्ग के लिए 35 फीसदी अंक लेना अनिवार्य होगा। लोकसेवा आयोग ने चयन प्रक्रिया में बदलाव एचएएस, वन सेवाएं,

एलाइड सेवाएं, नायब तहसीलदार और न्यायिक सेवा की भर्ती पर लागू नहीं होगा। अब एक पद के लिए एक ही आवेदन आने पर भी लिखित परीक्षा होगी। इसके अलावा इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवार की निजी जानकारी नहीं पूछी जाएगी। यह सभी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जिस से भर्ती में बदलाव किये गए।

Public Service Commission made a big change in the selection process of Class One and Two, a change in the selection process made in the year 1971 to bring transparency in the recruitment process.

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