प्रवासी मजदूरों की आवाज़ को Live करने पर “दिव्य हिमाचल” के पत्रकार पर FIR

हिमाचल प्रदेश में लगे क्लफ्यू के दौरान प्रदेश में प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को लेकर पत्रकार रिपोर्टिंग कर रहे थे। और प्रवासी मजदूरों पर रिपोर्टिंग करने के आरोप में इन पत्रकारों पर एफआईआर दर्ज करा दी गई है। जब की प्रेस को भारत का चौथा स्तम्भ माना जाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इनका गुनाह सिर्फ इतना था कि इन्होंने मजदूरों की समस्याओं को सरकार के सामने लाना चाहा।

जिसके चलते पिन प्रवासी मजदूरों की आवाज को उठाना चाहा लेकिन बदले में इन पत्रकारों को यह फल मिला। हमारे प्रदेश में दिन रात मेहन्नत कर के जनता तक हर समय की जानकारी पहुंचा रहे इन पत्रकारों पर एफआईआर कर दी है। केवल इस प्रेस के कारण ही देश था प्रदेश में जनता को काफी मदद मिलती है।

प्रदेश में प्रेस के साथ साथ गरीबो की आवाज़ पर भी हमला है यह एफआईआर

देश में कोरोनावायरस लगातार तेजी गति से फैल रहा है तथा इस कोरोनावायरस के चलते हुए मजदूरों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है वह आप देख ही सकते हैं सोशल मीडिया पर बहुत सारे वीडियो ऐसे हैं जो मजदूरो की हालात को बया करते है। कई मजदुर पैदल चल रहे हैं इसमें गर्भवती महिलाएं भी हैं जो पैदल अपने घर की ओर जा रही हैं। ऐसे में सरकार द्वारा यदि प्रेस कोई जानकारी पहुंचा रही है तो इस में गलत क्या है। प्रदेश में मजूदरी कर रहे नागरिको को भी भारत की नागरिकता मिली है।

प्रदेह में मजदूरों के हालत खराब, प्रेस ने आवाज़ उठाई तो कर दी एफआईआर

यह मजदुर कोई पाकिस्तान या अन्य किसी देश से नहीं बल्कि भारत के ही निवासी है। हिमाचल में बहुत से स्थानों से इन की बजह से सरकारी कार्यो को किया जाता है। जिनमे भवन, सड़के, जैसे बहुत से कार्य शामिल है। जिन में यह मजदूरी करते है। यह मजदुर आमिर होने के लिए हिमाचल नहीं आते बल्कि इन को दो समय की रोटी मिल जाए इस लिए आते है। ऐसे में सरकार यदि इन की मदद मनहि करेगी तो कोण करेगा।

दिन रात जनता के लिए जानकारी एकत्रित करने वाले प्रेस पर उठाये सवाल

लेकिन ऐसा लगता है की कोई इन मजदूरों की सुनने वाला ही नहीं है। सभी मंत्रीयो को अपने प्रान्त की चिंत्ता है, जहा से इन को वोट मिल सके। भला इन प्रवासियों को घर भेज के क्या मिलेगा। एक तरफ सरकार कई स्थानों से हिमाचल के लोगो को बापिस ला रही है। तो कई राज्यों में हिमाचल में फसे लोगो को भी भेज रही है। मगर कई स्थानों में प्रेस पर सवाल उठाये जा रहे है।

सरकार इन पत्रकारों की आवाज हमेशा के लिए बंद करना चाहती है

आज जब यह पत्रकार सरकार से सवाल पूछ रहे हैं इन गरीबों की आवाज सरकार तक पहुंचा रहे हैं तब सरकार इन पत्रकारों की आवाज हमेशा के लिए बंद करना चाहती है। जो लोग कहते थे प्रेस की आजादी पर हमला है आज इस रिपोर्ट के मुताबिक दावे के साथ कहा जा सकता है कि प्रेस की आजादी पर हमला है। तथा यह भारत के संविधान का उलघन भी माना जा रहा है।

गरीबो पर हो रहा अत्याचार

क्योंकि इसमें प्रेस के पत्रकारों के साथ साथ गरीबों की आवाज को भी दबाया जा रहा है। आप ने पिछले दिनों देखा ही होगा कि गरीबों के साथ कैसा बर्ताव हुआ था। गरीबो के साथ सड़कों पर जहां वो सो रहे थे तो पुलिस मारकर पुलिस भगा रही थी रेल की पटरियों के सहारे घर लौट रहे थे फिर वहां भी पुलिस मिलने लगी। मुझे मजदूरों ने सोचा कि रेल की पटरी ऊपर थोड़ा आराम कर ले तो वहां भी उन्हें अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा। ऐसे में यह गरीब लोग जाए तो कहा। सरकार को इस के लिए कुछ ना कुछ करना होगा नहीं तो यह आवाज़ पुरे भारत में जायेगी तथा जितने भी मजदुर संग है, प्रदेश सरकार को उन्हें इस का जबाब देना होगा।

मजदूरों का सोशल मीडिया के जरिए लाइव प्रसारण दिखा दिया तो कर दी एफआईआर

इन पत्रकारों का सिर्फ इतना कसूर था कि उन्होंने गरीबों की आवाज को उठाना चाहा। हिमाचल प्रदेश के लोकप्रिय प्रेस दिव्य हिमाचल अखबार के रिपोर्टर ओम शर्मा के खिलाफ अभी तक तीन एफ आई आर दर्ज हो चुकी हैं। इनका कसूर बस इतना था कि इन्होंने जो वहां प्रवासी मजदूर प्रदर्शन कर रहे थे इन्होंने उन मजदूरों का सोशल मीडिया के जरिए लाइव प्रसारण दिखा दिया था। तथा सरकार तक इन की आवाज़ को पहुंचाया। जिस से सरकार ने इन की आवाज़ को दबाने के लिए यह (FIR) का सिलसिला शुरू कर दिया।

सरकार को देना होगा जबाब

और भी कई पत्रकार हैं प्रदेश में, जगत बैंस , अश्वनी सैनी , विशाल आनंद , पंजाब केसरी के सोमदीव शर्मा , इन सभी पत्रकारों का जुर्म सिर्फ इतना था। कि इन्होंने गरीब मजदूरों की आवाज को उठाना चाहा और वहां की सरकार ने इनकी आवाज को बिल्कुल दबा दिया इन पत्रकारों पर लगातार 14 एफआईआर किए गए। यदि सरकार ने इस पर विचार नहीं किया तो प्रदेश ही नहीं बल्कि पुरे भारत की प्रेस इसका विरोध करेगी। आज जब गरीब मजदूर सड़कों पर चल रहे हैं और उनकी आवाज उठाने के लिए सरकार रोक रही है सचमुच यही प्रेस की आजादी पर हमला है। सरकार को इस पर जल्द विसहर कर के इन 14 एफआईआर पर विचार करना होगा।

If you raise the voice of the workers, then the FIR was lodged on the press / journalists considered as the fourth pillar of India, know the full information

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