राम मंदिर निर्माण में इस्तेमाल होगी, हिमाचल के देवभूमि कुल्लू की मिट्टी और जल

हिमाचल प्रदेश का कुल्लू जिला जिसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के लिए प्रदेश के कुल्लू जिले के देवालयों की मिट्टी और माता बूढ़ी नागिन की सरयोलसर झील का पवित्र जल इस्तेमाल होगा। इसी के साथ बुधवार को जिला भाजपा अध्यक्ष एवं भलाण स्थित भगवान लक्ष्मी नारायण मंदिर के पुजारी भीमसेन शर्मा ने ढालपुर में जिले के विभिन्न मंदिरों की मिट्टी एवं जल विश्व हिंदू परिषद के विभागाध्यक्ष अध्यक्ष हरदीप आचार्य को सौंपा।

ऐतिहासिक ठावा मंदिर के प्रांगण से पवित्र जल एवं मिट्टी विश्व हिंदू परिषद को सौंपी गयी

इसी के साथ भीमसेन शर्मा ने बताया कि नग्गर गांव से सटे प्राचीन एवं ऐतिहासिक ठावा मंदिर के प्रांगण से पवित्र जल एवं मिट्टी विश्व हिंदू परिषद को सौंपी गयी है। जानकारी के अनुसार अब हिमाचल का जल और पवित्र मिट्टी को अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

कुल्लू के विभिन्न धार्मिक स्थलों से एकत्रित की गयी पवित्र मिटटी और जल

इसी के साथ प्राप्त जानकारी के अनुसार श्रीकृष्ण का यह मंदिर करीब 8000 साल पुराना है। विहिप के विभाग अध्यक्ष हरदीप आचार्य ने बताया कि कुल्लू के रघुनाथ मंदिर, बिजली महादेव, खुडीजल देवता, खोखन के आदि ब्रह्मा मंदिर, के साथ प्रदेश के लोकप्रिय पर्टयक स्थान मनाली के मनु मंदिर, वशिष्ठ मंदिर, लक्ष्मी नारायण, महामाई गाड़ादुर्गा, कश्यप नारायण, लक्ष्मी नारायण मंदिर सराज नग्गर के बाला त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, मणिकर्ण

सरयोलसर झील के पवित्र जल को भी किया शामिल

के शिव मंदिर एवं राम मंदिर, दियार के त्रियुगी नारायण मंदिर, थरास के मारकंडा ऋषि, बंजार के शृंगा ऋषि मंदिर, हिडिंबा मंदिर,माता गायत्री मंदिर, शरबरी माता मंदिर, नग्गर के जगती पट्ट, हरिपुर के माधोराय मंदिर, अनंत बालूनाग, बुंगडू महादेव, बड़ा छमाहूं कोटला, सरयोलसर झील के पवित्र जल एवं मिट्टी को अयोध्या भेजा जा रहा है। प्रदेश के इस स्थान में सभी धार्मिक और पवित्र स्थलों से मिट्टी और जल को लिया जायेगा।

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