पहली जुलाई से स्कूल-कालेज में शिक्षक बुलाने के प्रस्ताव को सरकार ने रिजेक्ट किया,

हिमाचल प्रदेश में फैले कोरोना के चलते प्रदेश के सभी स्कूल और कॉलेज बंद थे। जिन्हे हल ही में खोलने का प्रस्ताव रखा गया था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पहली जुलाई से स्कूल-कालेज में शिक्षक बुलाने के प्रस्ताव को सरकार ने रिजेक्ट कर दिया है। जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को सरकार को उस वक्त रिजेक्ट करना

पड़ा, जब सोशल मीडिया पर स्कूल-कालेज खोलने पर कई तरह की अफवाहें आने लगी।

इसी लिए अभिभावकों को लगा कि अब छात्रों को भी स्कूलों में जाना पड़ेगा। जबकि शिक्षा विभाग के प्रस्ताव में साफ था।

शिक्षा विभाग का यह प्रोपोजल सरकार को भाया नहीं

प्राप्त जानकारी अनुसार केवल शिक्षक और गैर शिक्षकों को ही स्कूलों में बुलाया जाएगा। इसी के साथ शिक्षा विभाग की इसके पीछे मंशा यह थी कि शिक्षक शिक्षा व्यस्था को लेकर योजना बना सके। स्कूलों के आईसीटी लैब से छात्रों के साथ

ऑनलाइन हो सकें। मगर बताया जा रहा है की फिलहाल शिक्षा विभाग का यह प्रोपोजल सरकार को भाया नहीं और इसे खारिज कर दिया गया है।

साथ ही एमएचआरडी की गाइडलाइन के बाद ही सरकार इस पर कोई फैसला लेगी।

शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा है कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन आने से पहले शिक्षण संस्थान खोलने का फैसला नहीं लिया जाएगा

प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार को शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा है कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन आने से पहले शिक्षण संस्थान खोलने का फैसला नहीं लिया जाएगा। हिमाचल प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने का तर्क

देते हुए शिक्षा मंत्री ने उच्च शिक्षा निदेशालय के प्रस्ताव को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्कूल बुलाने में कोई जल्दबाजी नहीं की जाएगी। इसी के साथ शिक्षकों को बुलाने को लेकर भी अभी फैसला नहीं लिया जाएगा।

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