देशभर में लिए सैंपलों में से फेल हुईं 34 दवाओं में हिमाचल के उद्योगों की दवाये भी फेल

देश विदेश में फैले कोरोना वायरस की बजह जनता बेहद परेशान है। एक ओर कोरोना की वैक्सीन की खोज में पूरा विश्व जुटा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दूसरी ओर देश में बनने वाली दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतर रही हैं। इसमें एशिया की 45 फीसदी दवा निर्यात करने वाला हिमाचल प्रदेश भी शामिल है। इसी के साथ इस वर्ष जनवरी से मई माह तक 05 माह में 52 दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतरी हैं।

इससे पहले भी जनवरी में देशभर में लिए सैंपलों में से फेल हुईं 34 दवाओं में सूबे के उद्योगों की 04 और फरवरी में 38 में से 6 दवाएं, मार्च में 46 में से 13, अप्रैल में 59 में से 23 और मई में 25 में से 6 दवाएं फेल हुई हैं।

प्रदेश में करीब अब तक 750 फार्मा उद्योग हैं

जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश में इससे पहले 2019 में सूबे के उद्योगों की 100 दवाएं, जबकि 2018 में भी 100 दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं। हिमाचल प्रदेश में करीब अब तक 750 फार्मा उद्योग हैं। इनमें कई उद्योगों में निर्मित दवाओं पर सवाल उठते रहे हैं।

सीडीएससीओ की ओर से हर माह दिए जाने वाले ड्रग अलर्ट के बाद विभाग हरकत में

इसी के साथ सीडीएससीओ की ओर से हर माह दिए जाने वाले ड्रग अलर्ट के बाद विभाग हरकत में आता है। इन सैंपल के फेल होने वाली दवाओं का बैच मार्केट से उठा लिया जाता है। प्रदेश में सरकार दवाओं की गुणवत्ता को लेकर पहले ही फटकार लगा चुकी है। तथा पहले भी जांच के

ड्रग अलर्ट में फेल होने वाली दवाओं में हिमाचल प्रदेश के उद्योगों की दवाएं भी शामिल

प्राप्त जानकारी के अनुसार हर माह आने वाले सीडीएससीओ के ड्रग अलर्ट में फेल होने वाली दवाओं में हिमाचल प्रदेश के उद्योगों की दवाएं भी शामिल हैं। इसी के साथ ही राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाहा ने कहा कि दवाओं के फेल होने में वातावरण का भी असर रहता है। प्रदेश के जिला सोलन के बद्दी में जल्द ड्रग टेस्टिंग लैब खुल जाएगी। इसी के साथ उन्होंने कहा कि ताजा ड्रग अलर्ट के बाद दवा निरीक्षकों को इन पर कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। जल्द ही इन पर करवाई की जायेगी।

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