लाहौल-स्पीति को चंबा से जोड़ने वाला कुगति दर्रा करीब 09 माह बाद आवाजाही के लिए खुल गया

हिमाचल प्रदेश में स्तिथ जनजातीय जिला 16,800 फीट ऊंचा कुगति दर्रा करीब 09 माह बाद आवाजाही के लिए खुल गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गर्मियों में यह मार्ग जून से सितंबर तक यानी चार-पांच माह ही खुला रहता है। इस मार्ग का इतेमाल ज्यादा तर श्रदालु

करते है। हर साल भारी मात्रा में इस दर्रे से लोग आवाजाही करते है। इस पैदल मार्ग का इस्तेमाल ज्यादातर चंबा के मणिमहेश जाने वाले श्रद्धालु और ट्रैकर करते हैं। यह एक सौंदर्य से भरपूर रास्ता है।

कुगति पास होकर ही मणिमहेश की ओर निकलता

जानकारी के अनुसार यह रास्ता काफी जोखिम भरा है। इसी के साथ कठिन मार्ग होने के बावजूद लोग यहां से होकर 04 दिन बाद मणिमहेश झील पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस ओर से पथ यात्रा कर निकलने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। इसी के साथ त्रिलोकनाथ में मनाए जाने वाले ऐतिहासिक पोरी मेले के समापन पर श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्था कुगति पास होकर ही मणिमहेश की ओर

निकलता है। हिमाचल प्रदेश में कोरोना वायरस के चलते इस मार्ग पर श्रद्धालुओं की आवाजाही पर संशय है। इसी के साथ स्थानीय निवासी जोबरंग पंचायत के पूर्व प्रधान सोम देव योकी ने रास्ता खुलने की बात कही है।

भेड़पालकों ने कुगति पास पार कर लाहौल की पहाड़ियों का रुख किया है

बताया जा रहा है कि यह रूट काफी जोखिम और थकावट भरा है। इसके बावजूद मणिमहेश के दर्शनों को निकले श्रद्धालुओं के आगे पहाड़ बौने पड़ जाते हैं। जानकारी के अनुसार दो-तीन दिन पहले चंबा के भेड़पालकों ने कुगति पास पार कर लाहौल की पहाड़ियों का रुख किया है। सबसे पहले इस रास्ते में भेड़पालक जाते है। उसी के बाद यह दर्रा अन्य लोगो के लिए खुलता है।

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