समदो-काजा-ग्रांफू हाईवे का काम प्रदेश सरकार से वापस लेकर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को सौंपा

हिमाचल प्रदेश में स्तिथ अंतरास्ट्रीय सिमा भारत-चीन तनाव के बीच सीमा पर सड़कों के निर्माण में तेजी हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत सरकार के फैसले के बाद सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण 250 किलोमीटर लंबे समदो-काजा-ग्रांफू हाईवे का जिम्मा अब हिमाचल सरकार

से वापस लेकर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को सौंप दिया गया है। बताया जा रहा है की 18 जून को जारी राजपत्र में इसे अधिसूचित किया गया है। इसी के साथ एनएच काजा में बतौर अधिशाषी अभियंता का प्रभार देख रहे अधिकारी सोनम ज्ञामजो ने इसकी पुष्टि की है।

यह हाईवे लाहौल के ग्रांफू में मनाली-लेह सामरिक मार्ग से जुड़ता है

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह हाईवे लाहौल के ग्रांफू में मनाली-लेह सामरिक मार्ग से जुड़ता है। इसी के साथ स्पीति में यह मार्ग चीन बॉर्डर से सटे समदो तक जाता है।

भारतीय सेना के जवानों को आने-जाने में दिक्कत न हो, इसलिए सरकार इस हाईवे पर पैचवर्क का काम करवा रही थी।

जानकारी के अनुसार टारिंग के लिए सरकार ने बीआरओ को पत्र लिखकर सड़क का रिकॉर्ड मांगा था लेकिन इसी बीच इस हाईवे का

जिम्मा दोबारा बीआरओ के पास आ गया है। किन्नौर से चीन बॉर्डर तक जाने वाली सड़क की देखरेख के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार के निवेदन पर ही बीआरओ से सड़क लेकर दी गई है।

हाईवे का काम प्रदेश सराकर को मिलने से बीआरओ में तैनात करीब 250 स्थानीय मजदूर हुए थे बेरोजगार

जानकारी के अनुसार अप्रैल महीने में यह हाईवे हिमाचल प्रदेश सरकार को मिला तो स्पीति घाटी में बखेड़ा खड़ा हो गया।

इसी के साथ बीआरओ में तैनात करीब 250 स्थानीय मजदूर बेरोजगार हो गए। बताया जा रहा है की कई दिनों तक मजदूरों ने क्रमिक अनशन किया।

हालांकि, बाद में सरकार ने मजदूरों को रोजगार का आश्वासन देकर अनशन खत्म करवा दिया था।

इसी के साथ नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने इस मार्ग के कुछ प्वाइंटों में गुणवत्ता पर सवाल भी उठाए हैं।

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