ऐतिहासिक मिंजर मेले पर इस बार कोरोना वायरस की मार, वर्तमान हालातों को देखते हुए मेला होना काफी मुश्किल

हिमाचल प्रदेश का ऐतिहासिक मिंजर मेले पर इस बार कोरोना वायरस की मार पड़ सकती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान हालातों को देखते हुए मेला होना काफी मुश्किल लग रहा है।

बताया जा रहा है की जिला प्रशासन ने भी मेले को लेकर हामी नहीं भरी है। इसी के साथ स्थिति के हालातों के मद्देनजर मेले का आयोजन होना काफी मुश्किल लग रहा है।

इससे पहले हिमाचल प्रदेश के अन्य मेले भी कोरोना की भेंट चढ़ चुके हैं। यह तय माना जा रहा है कि इस बार मेला नहीं होगा प्रदेश में फैले कोरोना संकट में मेला आयोजित करवाना उचित नहीं माना जाएगा।

08 दिवसीय इस मेले में जहां करोड़ों का कारोबार होता है

चम्बा का यह मेला हर साल जुलाई माह के अंतिम रविवार से अगस्त माह के पहले रविवार तक चलता है। बताया जा रहा है की 08 दिवसीय इस मेले में जहां करोड़ों का कारोबार होता है।

साथ ही सांस्कृतिक संध्याएं भी होती हैं। इसमें नामी कलाकार प्रस्तुतियां देते हैं। लेकिन इस बार मेले को लेकर स्थिति साफ नहीं है। आमतौर पर मेले की व्यवस्था बनाने के

लिए बैठकों का दौर अप्रैल माह से शुरू हो जाता था। बताया जा रहा है की इस बार जून माह खत्म होने को है, लेकिन प्रशासन ने एक भी बैठक नहीं बुलाई है।

इससे साफ है कि प्रशासन भी मेला करवाने के पक्ष में नहीं है। इस लिए इस बार मिंजर मेला ना के बराबर है।

कांगड़ा पर विजय का प्रतीक माना जाता है यह मिंजर मेला

चम्बा का यह मिंजर मेला 935 ई. में त्रिगर्त जो अब काँगड़ा है यहां के शासक पर चंबा के राजा की विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि अपने विजयी राजा की वापसी पर लोगों ने धान और मक्का की मालाओं से उनका

अभिवादन किया था। जो कि समृद्धि और खुशी का प्रतीक माना जाता है। इसी लिए तभी से हर साल यह मेला आयोजित किया जाता है।

मगर इस बार कोरोना की बजह से यह मेला होना मुश्किल है।

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