हिमाचल में सभी छोटे बड़े जलाशयों में मत्स्य आखेट पर लगा प्रतिबंध हटा, 19 मीट्रिक टन मछली की पैदावार, गोबिंदसागर में सर्वाधिक 9.3 मीट्रिक टन मछली पकड़ी

हिमाचल प्रदेश के सभी छोटे बड़े जलाशयों में मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध लगा था, जो हाल ही में हटने के बाद पहले ही दिन रविवार को भरी मात्रा में व्यवसाय किया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस दिन लगभग 30 लाख का कारोबार दर्ज किया गया है। इस बार हिमाचल प्रदेश के सभी जलाशयों में 19 मीट्रिक टन मछली की पैदावार हुई है।

बताया जा रहा है की अकेले गोबिंदसागर में पिछले साल की तुलना में इस बार एक मीट्रिक टन अधिक बढ़ोतरी की गयी है।

इसी के साथ बिग हैड प्रजाति की मछली 40 किलोग्राम पाई गई है। जिस बजह से मछली व्यपारियो को बेहद राहत मिली है।

मत्स्य निदेशालय बिलासपुर में कार्यरत निदेशक सतपाल मेहता ने दी जानकारी

प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की जलाशयों में पानी लबालब भरा होने के चलते मछली की ब्रीडिंग सही हुई है। बताया जा रहा है की इसी के

साथ मत्स्य निदेशालय बिलासपुर में कार्यरत निदेशक सतपाल मेहता ने बताया कि मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध हट गया है और शनिवार रात को ही मछुआरों ने

जलाश्यों में जाल लगा दिए थे। साथ ही रविवार को मत्स्य आखेट के पहले दिन 19 मीट्रिक टन मछली पकड़ी गई है।

इस बार गोबिंदसागर में सर्वाधिक 9.3 मीट्रिक टन मछली पकड़ी गई है। जबकि पिछले साल 8.4 मीट्रिक टन थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इसी प्रकार पौंग डैम में 7.2 मीट्रिक टन चमेरा डैम और रणजीत सागर डैम में 2.1 मीट्रिक टन मछली पकड़ी गई है।

मछुआरों को 80 फीसदी जबकि शेष राशि विभाग और मत्स्य सहकारी सभाओं की हिस्सेदारी बनती है

प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा कि इस बार जलाशयों में पहले ही दिन तीस लाख रुपए के करीब कारोबार किया गया है।

इसी के साथ बताया जा रहा है की जिसमें मछुआरों को 80 फीसदी जबकि शेष राशि विभाग और मत्स्य

सहकारी सभाओं की हिस्सेदारी बनती है। इसी के साथ उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश के बड़े छोटे सभी जलाशयों में 58 सोसायटियों के माध्यम से मत्स्य आखेट का कार्य किया जा रहा है।

जिसमें अकेले गोबिंदसागर में ही 34 सोसायटियां कार्यरत हैं। जो यहां मछलिया पकड़ने आते है।

16 अगस्त को रविवार को मत्स्य आखेट से बैन हटाया

हिमाचल प्रदेश में स्तिथ सभी सोसायटियों के अलग अलग रेट हैं। बता दें कि मत्स्य विभाग ने बेहतर उत्पादन के मद्देनजर इस बार 16 जून से लेकर 15 अगस्त तक क्लोज सीजन के तहत मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध लगाया था।

जबकि बताया का रहा है की पहले 01 जुलाई से लेकर 31 अगस्त तक मत्स्य आखेट बंद रहता था। इसी के साथ 16 अगस्त को रविवार को मत्स्य आखेट से बैन हटाया गया है।

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